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115 साल का हुआ कालका-शिमला हेरीटेज ट्रैक, महात्मा गांधी से खास कनेक्शन, 10 अनकही बातें

Sat, 10 Nov 2018 02:32 PM IST
सौरभ यादव, अमर उजाला, कालका(पंचकूला)
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टॉय ट्रेन
खूबसूरत वादियों के विहंगम नजारे दिखाते हुए लोगों को कालका से शिमला ले जाने वाला हेरीटेज ट्रैक 115 साल का हो गया। इसका महात्मा गांधी से खास कनेक्शन है, पढ़ें वो राज जिन्हें जानता नहीं कोई।
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टॉय ट्रेन
उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है
विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग की शुरुआत 9 नवंबर 1903 को हुई थी। अपने 115 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए हुए है। उक्त रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था।
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टॉय ट्रेन
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी यात्रा की थी
रेलमार्ग कालका स्टेशन (656 मीटर) से शिमला (2,076 मीटर) तक जाता है। 96 किमी. लंबे इस रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी। समरहिल स्थित राजकुमारी अमृतकौर का घर भी महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं का साक्षी है। इस रेल मार्ग को 10 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया था।

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टॉय ट्रेन
1896 में दिल्ली-अंबाला कंपनी ने बनाना शुरू किया था
यह ट्रैक सैलानियों को खास पसंद है, क्योंकि जब घुमावदार पहाड़ों के बीच से टॉय ट्रेन गुजरती है तो नजारा अद्भुत होता है। अंग्रेजों ने हिमाचल के किन्नौर जिले के कल्पा में इस रेल ट्रैक को बनाने का प्लान बनाया था। पहले यह रेल ट्रैक कालका से किन्नौर तक पहुंचाया जाना था, लेकिन बाद में इसे शिमला लाकर पूरा किया गया। ब्रिटिश शासन की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को कालका से जोड़ने के लिए वर्ष 1896 में दिल्ली-अंबाला कंपनी को इस रेलमार्ग के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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टॉय ट्रेन
एक बार इसे बनाने का काम बीच में छूटने वाला था
समुद्र तल से 656 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालका (हरियाणा) रेलवे स्टेशन को छोड़ने के बाद ट्रेन शिवालिक की पहाड़ियों के घुमावदार रास्ते से गुजरते हुए 2,076 मीटर ऊपर स्थित शिमला तक जाती है। अंग्रेजों ने इस रेल ट्रैक पर जब काम शुरू किया तो बड़ोग में एक बड़ी पहाड़ी की वजह से ट्रैक को आगे ले जाने में दिक्कते आने लगीं। एक बार तो हालात यह बन गए कि अंग्रेजों ने इस ट्रैक को शिमला तक पहुंचाने का काम बीच में ही छोड़ने का मन बना लिया था।
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टॉय ट्रेन
निराश होकर कर्नल बड़ोग ने कर ली थी सुसाइड
इस वजह से ट्रैक का काम देख रहे कर्नल बड़ोग ने निराश होकर आत्महत्या कर ली थी। उन्हीं के नाम पर आज बड़ोग स्टेशन का नाम रखा गया है। वर्तमान में ट्रैक से छह ट्रेनों का संचालन हो रहा है- सुबह 3:30 बजे 52457 पैसेंजर, सुबह 5 बजे 72451 रेल कार , सुबह 5:20 बजे 52451 शिवालिक डिलक्स, सुबह 6:00 बजे 52453 मेल एक्सप्रेस, सुबह 8:30 बजे अप-मिक्स, दोपहर 12:10 बजे 52455 हिमालयन एक्सप्रेस।
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टॉय ट्रेन
103 सुरंगें होती है सैलानियों के आकर्षण का केंद्र
कालका-शिमला रेलवे लाइन पर 103 सुरंगें सफर को और भी रोमांचक बनाती है। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है जिसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन अढ़ाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल है जिस पर सफर और भी रोमांचक हो जाता है। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग को नैरोगेज लाइन कहते हैं। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।

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टॉय ट्रेन
जुलाई में मिला था विश्व धरोहर का दर्जा
कालका-शिमला रेलवे लाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था। इसके अलावा कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते हुए यह पुल 64.76 किमी. पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं। यह इंडियन रेलवे में आर्च गैलरी पुल सबसे बेहतरीन पुलों में शामिल है।

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टॉय ट्रेन
बाबा भलकू के सहयोग से पूरी हुई थी सुरंग
कालका से 41 किमी दूर बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास ही बड़ोग सुरंग है जिसे सुरंग नंबर 33 भी कहते हैं। 1143.61 मीटर लंबी सीधी सुरंग है। इस सुरंग को बनाते हुए जब दोनों सिरे नहीं मिले थे तो ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने एक रुपया जुर्माना लगने के कारण आत्महत्या कर ली थी। बाद में बाबा भलकू के सहयोग से यह सुरंग पूरी हुई थी।
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टॉय ट्रेन
बॉलीवुड के लिए भी रहा है आकर्षण केंद्र
कालका-शिमला रेलवे लाइन बॉलीवुड के लिए भी आकर्षण केंद्र रहा है। 1974 में आई सुपरहिट फिल्म ‘दोस्त’ का गाना ‘गाड़ी बुला रही है’ भी इसी मार्ग पर फिल्माया गया। 1960 में शम्मी कपूर की फिल्म ‘ब्वाय फ्रेंड’ का गाना ‘मुझको अपना बना लो’ कालका-शिमला रेलमार्ग पर शूट हुआ था। साल 2000 में आई प्रीति जिंटा की फिल्म ‘क्या कहना’ में भी कालका-शिमला रेल और उसके कुछ स्टेशनों की छवि देखी जा सकती है। इसके अलावा ऑल इज वेल, जब वी मेट, सनम रे और ‘रमैया वस्तावैया’ जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।
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