पहली बार अपने पैतृक निवास रोहतक पहुंचे हिमाचल प्रदेश के नए गर्वनर आचार्य देवव्रत ने 10 ऐसे काम गिना दिए, जिन्हें वे सबसे पहले करेंगे।
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वे 10 काम, जो सबसे पहले करेंगे हिमाचल के नए राज्यपाल
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आचार्य देवव्रत ने कहा कि वे हिमाचल राजभवन से मयखाने को बाहर निकालेंगे। अब वहां सुबह-शाम यज्ञ हुआ करेगा। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। आचार्य गर्वनर बनने के बाद पहली बार रोहतक आए और दयानंद मठ के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की।
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आचार्य देवव्रत ने कहा कि वे हिमाचल में गौ पालन और नस्ल सुधार, जैविक खेती, हिमाचल को शराब मुक्त बनाना, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण, वैदिक ज्ञान को बढ़ावा, स्वच्छता और संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे।
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आचार्य ने बताया कि ये काम उन्हें पीएम मोदी ने उस वक्त सुझाए, जब उन्होंने मोदी से कहा कि मैं बंद कमरे में नहीं बैठा रहना चाहता बल्कि कुछ काम करना चाहता हूं। मुझे जिस पद पर बैठाया गया है, उस पर तो बुजुर्ग बैठते हैं। मेरी आयु कम है, इसलिए मुझे समाज के लिए कुछ करने का अवसर दिया जाए।
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आचार्य ने कहा कि मैं अब संरक्षक बनकर गुरुकुल के साथ्ा रहूंगा। यह गुरुकुल मेरी आत्मा है। आज मेरे पास खुद का घर भी नहीं है। इतना कहते हुए गुरुकुल कुरुक्षेत्र को याद कर राज्यपाल की आंखें भर आईं।
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आचार्य ने कहा, मैं आर्य समाज का कृतज्ञ हूं। आर्य सभा ने मुझे बहुत स्नेह दिया। इसका मैं सदैव आभारी रहूंगा। मुझे जो संवैधानिक पद मिला है, वह महर्षि दयानंद व आर्य समाज की ही देन है। मुझे 6 वर्ष की आयु में गुरुकुल भेज दिया गया था, वहीं से मुझे संस्कार मिले हैं।
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आचार्य ने कहा, मैं आर्य समाज का कृतज्ञ हूं। आर्य सभा ने मुझे बहुत स्नेह दिया। इसका मैं सदैव आभारी रहूंगा। मुझे जो संवैधानिक पद मिला है, वह महर्षि दयानंद व आर्य समाज की ही देन है। मुझे 6 वर्ष की आयु में गुरुकुल भेज दिया गया था, वहीं से मुझे संस्कार मिले हैं।
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राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने आर्य समाज के लोगों को हिमाचल प्रदेश के राजभवन में आने का न्यौता भी दिया। कहा, मैं किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं हूं। मुझे संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिली है, उसे मैं पूरी तरह से निभाऊंगा।