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सफलता की कहानियां : कहीं प्लंबर की बेटी, तो कहीं गरीब की बिटिया ने रोशन किया नाम

Sun, 29 May 2016 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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Students - फोटो : अमर उजाला
सावित्री बाई फूले इंटर कॉलेज की छात्रा अनीता अपनी प्रतिभा की चमक जापान में बिखेर रही है। हाल ही में स्कॉलरशिप पाकर जापान में शिक्षा ग्रहण करने गई इस छात्रा को 10वीं की परीक्षा में 10 सीजीपीए ग्रेड मिले हैं। छात्रा ने जापान में ही पास होने की खुशी अपने जापानी मित्रों के साथ साझा की। सूरजपुर के देवला गांव में रहने वाले निराकर बेहरा प्लंबर हैं। वह मूलरूप से उड़ीसा के निवासी हैं। उनकी बेटी अनीता ने सावित्री बाई फूले बालिका इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की परीक्षा दी थी।
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- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को जारी हाईस्कूल के परिणाम में अनीता को ए-1 ग्रेड (10 सीजीपीए) मिला है। वह फिलहाल टोकियो के मामत्सू स्थित स्कूल में निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने के लिए गई है। वह 11वीं और 12वीं की पढ़ाई यहीं पर पूरी करेगी। अनीता अप्रैल में जापान के लिए रवाना हुई थी। दरअसल अनीता ने जापान के एक एनजीओ द्वारा आयोजित प्रतिभा परीक्षा उत्तीर्ण की थी। निराकर ने फोन पर बेटी को रिजल्ट के बारे में जानकारी दी, तो वह खुशी से झूम उठी। अनीता के पिता ने बताया कि हाईस्कूल का परिणाम जानकर बेटी बहुत खुश है। बेटी की उपलब्धियों से गदगद निराकर ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। आज के समय में हर क्षेत्र में बेटियां माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
आर्थिक तंगी के बावजूद दिखाया दस का दम : पल्ला नहर पार सरस्वती कॉलोनी के मध्यम परिवार से ताल्लुक रखने वाली दीपांशी पचांग ने अपनी मेहनत और लगन से 10वीं में दस में से दस अंक प्राप्त कर अपने क्षेत्र में परचम लहराया है। उन्हें सभी विषय में ए-1 ग्रेड मिला है। अमर उजाला से बातचीत में दीपांशी ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक-ठाक नहीं थी। उनके पिता लाल बहादुर सिक्योरिटी एजेंसी में फील्ड वर्कर के रूप में काम करते हैं। माता देवी गृहणी हैं। दोनों बहनों की फीस पापा जैैसे-तैसे भर देते थे। तमाम मुश्किलों के बीच दीपांशी ने अपनी मेहनत व कठिन परिश्रम से दस सीजीपीए पाया है। दीपांशी पल्ला स्थित तरुण निकेतन पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं। यह 11वीं में मेडिकल लेकर डॉक्टर बनना चाहाती है और घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना इनका सपना है। वह इस उपलब्धि का श्रेय अपने अभिभावक व अध्यापकों को दे रही हैं। स्कूल के चेयरमैन कमल तंवर ने कहा कि 11वीं में उन्हें छात्रवृति दी जाएगी।

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- फोटो : अमर उजाला
बिना ट्यूशन मारी बाजी : ओल्ड फरीदाबाद की कशिश ने 10 सीजीपीए हासिल कर सफलता अर्जित की है। सभी विषय में उन्होंने ए वन प्राप्त किया है। सेक्टर-15 स्थित विद्या मंदिर स्कूल की छात्रा है। कशिश कहती है कि नियमित पढ़ाई करने से ट्यूशन की जरूरत नहीं पड़ती और अच्छे अंक भी प्राप्त होते हैं। उनके पिता प्रकाश गोयल का अपना व्यापार हैं। मां रजनी देवी गृहणी है। कशिश 11वीं में कामर्स लेकर सीए बनना चाहती हैं। उन्होंने बताया परीक्षा के समय उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिला।
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- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर बनना चाहती है विनिता : सेक्टर-37 मॉर्डन पब्लिक स्कूल की विनिता ने दसवीं में दस का दमखम दिखाया है। 10 सीजीपीए मिलने से स्कूल से लेकर परिवार में खुशी की लहर है। आगे मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती हैं। डॉक्टर बनना उनका लक्ष्य है। उनका कहना है कि टेंशन फ्री होकर पढ़ने से सफलता प्राप्त की जा सकती है। बदरपुर बॉर्डर की रहने वाली विनिता के पिता ओमप्रकाश गुप्ता एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। उन्हें अपनी बेटी की सफलता पर गर्व है। स्कूल के चेयरमैन एसएल गुप्ता ने विनिता को बधाई दी।
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Students - फोटो : अमर उजाला
कमजोरी को ताकत बनाकर पाए 10 सीजीपीए : महामाया बालिका स्कूल में पढ़ने वाली तीन छात्राओं ने अपनी कमजोरी को ही ताकत बनाकर 10वीं में बेहतरीन रिजल्ट दिया है। तीनों के परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। इस वजह से इनकी पढ़ाई में भी कठिनाई आ रही है, लेकिन ये तीनों इससे टूटी नहीं, बल्कि इन्होंने इसका डटकर मुकाबला किया और सपने पूरा करने में लग गईं। इनका कहना है कि 10वीं में 10 सीजीपीए लाकर अपने सपने की तरफ पहला कदम रखा है। इनका कहना है कि ‘कामयाब नहीं, काबिल बनो, कामयाबी झक मार के पीछे आएगी’। इसी फंडे पर ये तीनों चल रही हैं।
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सीए बनना है निशा का सपना : निठारी में रहने वाली 16 साल की निशा मंडल की मां नैनी जॉब करने वाले अभिभावकों के घर में जाकर उनके बच्चे संभालती है। निशा के पिता शिवा मंडल की कई महीनों से नौकरी छूटी हुई है। इस वजह से आर्थिक हालत ठीक नहीं है। फिर भी निशा ने कठिनाइयों को मात देकर अच्छा रिजल्ट पाया है। निशा ने बताया कि मेरा एक भाई और एक बहन है। दोनों ही 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं। हम ट्यूशन तक नहीं लगा पाते हैं। स्कूल की फीस देने के लिए मां को नौकरी करनी पड़ी है। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं कामयाब बन सकूं। मैं 11वीं में कॉमर्स स्ट्रीम में दाखिला लूंगी और सीए बनूंगी। 

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आईएएस बन पुलिस का रवैया ठीक करेंगी निधि : निधि के पापा ऑटो चालक हैं। निधि ने बताया कि पापा जब भी ऑटो चलाते हैं, तब पुलिस वाले उन्हें बहुत परेशान करते हैं। एक बार तो पापा के साथ मारपीट तक हो गई थी, तभी से मैंने ठान लिया था कि मैं बड़ी होकर आईएएस अधिकारी बनूंगी और पुलिस के व्यवहार को ठीक करूंगी। 10वीं में 10 सीजीपीए लाने के बाद मैंने अपने लक्ष्य की ओर पहला कदम रखा है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। दो छोटे भाई-बहन हैं। उनका भी पढ़ाई का खर्च होता है। ऐसे में पापा पर बहुत दबाव रहता है। अक्सर पापा उधार मांगकर हम लोगों की फीस भरते हैं।

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स्किन स्पेशलिस्ट बनेंगी पल्लवी : 15 साल की पल्लवी चौधरी न सिर्फ पढ़ाई में अव्वल है, बल्कि उसने हॉकी में भी महारत हासिल की हुई है। हालांकि आर्थिक स्थिति कई बार पल्लवी के सपनों के बीच में आती है। पल्लवी ने 10वीं में 10 सीजीपीए हासिल किए हैं। पल्लवी ने बताया कि उसके पापा मनोज चौधरी लाइटिंग का काम करते हैं। महीने में 8 से 9 हजार रुपये कमा पाते हैं। बड़ी मुश्किल से घर का गुजारा चल पाता है। संयुक्त परिवार होने की वजह से थोड़ी बहुत मदद मिल जाती है। पल्लवी ने बताया कि उसके चाचा प्राइवेट स्कूल में बस चलाते हैं। दादा कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड हैं। मैं स्किन स्पेशलिस्ट बनना चाहती हूं।

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एसएनडी स्कूल में 134-ए के तहत ली है शिक्षा : यदि कोई मेहनत के दम पर कुछ हासिल करना चाहे तो दुनिया की कोई भी ताकत या आने वाले अभाव उसके रास्ते को रोक नहीं सकते। एसएनडी स्कूल में शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत दसवीं की शिक्षा लेने वाली ज्योति शर्मा व नीशु तेवतिया ने शनिवार को घोषित सीबीएसई के परीक्षा परिणाम में 10 सीजीपीए अंक लेकर साबित भी कर दिया है। अब दोनों छात्राएं आईएएस बनकर देश व गरीबों की सेवा करना चाहती हैं। 

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शहर निवासी ज्योति शर्मा के पिता ईश्वर दत्त शर्मा का उस समय निधन हो गया था, जबकि ज्योति बहुत छोटी थी। मां रेखा शर्मा गृहणी हैं व पति के देहांत के बाद बच्चों के साथ अपने मायके में रहना शुरू कर दिया। आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के चलते पढ़ाई में भी बाधा आनी शुरू हो गई। लेकिन उस बाधा को एसएनडी स्कूल के संचालक ने शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत दूर किया। और अब ज्योति ने अपनी मेहनत के दम पर परीक्षा में 10 सीजीपीए अंक प्राप्त किए। ज्योति का कहना है कि वह बड़ी होकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है।
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इसी प्रकार गांव अलावलपुर की नीशु तेवतिया ने भी एसएनडी स्कूल में ही शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत शिक्षा ली है। नीशु के पिता राजकुमार पेशे से किसान हैं तथा मां घर का कार्य करती है व किसानी में पति का हाथ बंटाती है। राजकुमार के अनुसार उसने सोचा भी नहीं था कि अभाव में पढ़ाई कर भी उनकी बेटी शिक्षा में इतना ऊंचा मुकाम हांसिल करेगी। परिणाम से उत्साहित नीशु भी भविष्य में आईएस अधिकारी बनने को अपना लक्ष्य बना रही है। स्कूल शिक्षा समिति के सचिव रघुराज डागर ने दोनों छात्राओं को बधाई दी है। डागर के अनुसार स्कूल के 17 छात्रों ने 10 सीजीपीए व 43 छात्रों ने नौ सीजीपीए अंक प्राप्त किए हैं।
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