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नोटबंदी ने दिए ये 6 सबक, सीखेंगे तो रहेंगे फायदे में

Thu, 19 Apr 2018 04:53 PM IST
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल
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कैश
नोटबंदी को हुए आज एक साल हो गया है। इस साल में आम लोगों को पर्सनल फाइनेंस के लिहाज से एक अच्छा सबक भी मिला था। कैश रखने वाले सभी लोगों को डिजिटल इकोनॉमी में काम करने की आदत डाली गई, इसके साथ ही प्लासटिक मनी का चलन भी बढ़ा। नोटबंदी ने एक साल में लोगों को 6 सबक दिए हैं, जिनके बारे में हम आगे आपको बताने जा रहे हैं। 
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रुपये
कैश को इन्वेस्ट करने में फायदा
नोटबंदी ने जो पहला सबक सभी को दिया वो था कि आप कैश को घर में दबा कर न रखें। ज्यादातर भारतीयों में सेविंग की आदत होती है और एक साल पहले लोगों के घरों में कैश काफी अच्छी संख्या में पड़ा रहता था। अब लोग कैश को घर पर रखने के बजाय इन्वेस्ट करने लगे हैं। पैसा घर के बजाय बैंक अकाउंट या फिर सरकार की किसी भी योजना में निवेश कर सकते हैं। इसके साथ ही छोटे-बड़े कारोबारी जो केवल कैश से बिजनेस करते थे, उनको भी नेटबैंकिंग और क्रेडिट व डेबिट कार्ड से लेन-देन करने की आदत पड़ गई। 
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डिजिटल इंडिया - फोटो : twitter
डिजिटल पेमेंट करना सीखा
देश में नोटबंदी से पहले डिजिटल पेमेंट करने के तौर तरीकों के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। नोटबंदी के बाद न केवल डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़े, बल्कि लोगों को भी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना सीखा दिया। हालांकि शुरू में लोगों को इनका इस्तेमाल करने में दिक्कत हुई, पर अब देश की एक बड़ी आबादी को डिजिटल पेमेंट करना आ गया है। मोबाइल वॉलेट और भीम जैसे ऐप की मदद से लोग आसानी से अपने मोबाइल फोन के जरिए पैसा ट्रांसफर करना सीख गए हैं। 

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बढ़ा प्लास्टिक मनी का चलन
क्रेडिट-डेबिट कार्ड का प्रयोग करना न केवल आसान है,  बल्कि इससे आपको ले जाने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती है। पहले जहां लोग भारी भरकम कैश ले जाते थे, जिससे चोरी या लूट-पाट होने का खतरा हमेशा बना रहता था। लेकिन कार्ड होने के कारण अब लोग कैश बहुत ही कम संख्या में अपने पास रखते हैं। 
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टैक्सपेयर की बढ़ी संख्या
नोटबंदी के एक साल बाद देश भर में टैक्सपेयर की संख्या में काफी इजाफा हो गया है। नोटबंदी के बाद 2 लाख रुपये से अधिक कैश डिपॉजिट करने वालों को अपने आईटीआर में जानकारी देनी पड़ी थी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी ऐसे लोगों को नोटिस भेजे जिन्होंने लिमिट से ज्यादा कैश जमा किया। इसलिए उन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 
 
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खर्च करने पर लगी लिमिट
नोटबंदी से पहले लोग काफी कैश में खर्च करते थे, लेकिन एक साल में इसमें काफी लगाम लग गई है। एटीएम और बैंक में होने वाले ट्रांजेक्शन पर लिमिट लगने के कारण अब कैश को लोग सभंलकर खर्च करने लगे हैं, जिससे फालतू कैश खर्च करने से लोग कतराने लगे हैं। 
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गुल्लक का बढ़ा प्रयोग
नोटबंदी के वक्त लोगों के घरों में बच्चों को दी गई गुल्लक काफी काम में आई थी, क्योंकि इसमें छुट्टे पैसे और छोटे नोटों को जमा किया जाता था। इससे उस वक्त चेंज की टेंशन लोगों को नहीं हुई थी। नोटबंदी के बाद जो लोग पहले गुल्लक नहीं रखते थे, उन्होंने भी अपने घरों में गुल्लक रखना शुरू कर दिया है।
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