कंपनी के लिए आईपीओ का लाने का मूल मकसद बाजार से पैसे जुटाना होता है, इसलिए यह आमतौर पर कम कीमत पर जारी किया जाता है। सेबी के नियमानुसार, कंपनी को आईपीओ लाने से पहले ही उसकी अनुमानित कीमत निवेशकों को बतानी होती है, जिसे प्राइस बैंड कहा जाता है। यह वास्तविक कीमत से कुछ कम या ज्यादा हो सकती है। आईपीओ को बाजार में उतारने से पहले कंपनियों को सेबी की मंजूरी लेना जरूरी है और मंजूरी के सालभर के भीतर इसे उतारना होता है।