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जल्द दौड़ने वाली है भारत में निर्मित पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन, खूबियां ऐसी कि बुलेट को देगी मात

Fri, 06 Jul 2018 07:16 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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रेल पटरियों पर अगले दो महीने में देश में निर्मित पहली सेमी हाई-स्पीड ट्रेन दौड़ने लगेगी। इंटेग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में तैयार किए गई इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। अगर ट्रेन की खूबियों की बात करें तो फिर यह भविष्य में चलने वाली बुलेट ट्रेन और फिलहाल चल रहीं तेजस व हमसफर ट्रेनों को भी मात करेगी। 
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16 महीने में बना दी मेट्रो जैसी पूरी ट्रेन

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विश्व भर में जहां ऐसी ट्रेन को बनने में 2 से 3 साल का समय लगता है, वहीं इस ट्रेन को कोच फैक्ट्री ने मेक इन इंडिया के तहत 16 महीने में तैयार कर दिया है। इस ट्रेन में इंजन नहीं होगा, हर कोच अपने आप में पॉवर वेगन का काम करेगा। स्वदेशी तकनीक पर तैयार यह ट्रेन हाई स्पीड इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट ट्रेनसेट होगी। 
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30 सेकेंड में पकड़ेगी पूरी रफ्तार

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यह ट्रेन तीव्र गति पकड़ने वाली होगी। अमूमन ट्रेन को 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पकड़ने के लिए 6 मिनट लग जाते हैं, लेकिन यह हाई स्पीड ट्रेन सेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक से महज 30 सेकेंड में अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेगी। 

शताब्दी की जगह चलेगी यह ट्रेन

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यह ट्रेन अभी चल रही शताब्दी ट्रेनों की जगह लेगी। फिलहाल कोच फैक्ट्री में इस ट्रेन के छह सेट बन गए हैं, जिन्हें आगे चलाया जाएगा। इस ट्रेन में यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है। 
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दरवाजे होंगे ऑटोमेटिक

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इस ट्रेन में दरवाजे मेट्रो ट्रेन की तरह ऑटोमेटिक होंगे। यानि की स्ट्रेशन के आने पर बंद होंगे और खुलेंगे। ट्रेन के चलते ही फुट स्टेप ऑटोमेटिक वापस हो जाएगा और ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकते ही फुट स्टेप खुल जाएगा। इसमें विमानों जैसे वैक्यूम आधारित बायो टायलेट होगा। 
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दिव्यांगों के लिए होगी जगह

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इस ट्रेन में दिव्यांगों के लिए पहले से जगह आरक्षित होगी। जैसा मेट्रो में आखिरी कोच में व्हीलचेयर लगाने के लिए अलग से जगह होती है, वैसी ही जगह ट्रेन के प्रत्येक कोच में दी गई है। इससे दिव्यांग लोग भी आसानी से ट्रेन में सफर कर सकेंगे। 
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एग्जिक्यूटिव क्लास में रोटेटिंग सीट

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ट्रेन के एग्जिक्यूटिव क्लास में सफर करने वाले यात्रियों की सीट रोटेटिंग होगी। इससे वो आसानी से उस दिशा में अपनी सीट को घुमा सकेंगे, जिस दिशा में ट्रेन यात्रा कर रही होगी। अभी शताब्दी ट्रेनों के चेयर कार में आधी सीटें समान दिशा और आधी विपरीत दिशा में होती हैं।  
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