माता-पिता हमेशा चाहते हैं कि उनके बच्चे काबिल बनें, सही से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और इसके लिए वे उन्हें तमाम सुविधाएं देते हैं। लेकिन इस चक्कर में अक्सर उनका अपना भविष्य खतरे में पड़ जाता है। वे बच्चों को अच्छे स्कूल-कॉलेज में पढ़ाने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि खुद के रिटायरमेंट की प्लानिंग ही नहीं कर पाते, जबकि रिटायरमेंट की प्लानिंग बहुत जरूरी होती है। इससे आपका भी भविष्य बेहतर और खुशहाल होता है। हालांकि घर खर्च, बच्चों की उच्च शिक्षा और उनकी शादी वगैरह के लिए माता-पिता बिना आगे की प्लानिंग किए भारी-भरकम लोन तक ले लेते हैं, जो उनके रिटायरमेंट की प्लानिंग पर भी पानी फेर देता है। ऐसे में जब बच्चे अच्छे से पढ़-लिख जाते हैं, अच्छी नौकरी या व्यवसाय करने लगते हैं तो यह उनकी भी जिम्मेदारी बन जाती है कि वे पैरेंट्स की रिटायरमेंट प्लानिंग में मदद करें, लेकिन कैसे? आइए जानते हैं इसके बारे में...