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Zero Shadow Day: भारत में कुछ पल के लिए नहीं दिखाई दी किसी की भी परछाई, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

Fri, 18 Aug 2023 01:01 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Zero Shadow Day - फोटो : Twitter@bigfundu
Zero Shadow Day: खगोलीय दृष्टिकोण से देखें, तो 18 अगस्त का दिन बेहद अद्भुत है। भारत में आज बेहद अनोखी खगोलीय घटना देखने को मिली है। भारत के बेंगलुरु में जीरो शेडो डे के तौर पर मनाया गया। यहां पर दोपहर 12 से 1 बजे के बीच डेढ मिनट के लिए लोगों को अपनी परछाई नहीं नजर आई। यह स्थिति साल में दो बार बनती है जब हर चीज की परछाई गायब हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कुछ समय के लिए सूरज की किरणें लंबवत पड़ती हैं, जिसकी वजह से कुछ पल के लिए किसी भी चीज की परछाई गायब हो जाती है। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब सूरज पृथ्वी के बीचों बीच यानी बिल्कुल ऊपर आ जाता है, तो किसी चीज की परछाई दिखाई नहीं देती है। ऐसा नहीं है कि परझाई पूरे दिन नजर नहीं आती है। यह दृश्य सिर्फ डेढ़ मिनट के लिए दिखाई देता है, जब सूर्य की किरणें धरती पर लंबवत पड़ती हैं। उस दौरान परछाई पैरों के बिल्कुल नीचे आ जाती है जिसकी वजह से परछाई नजर नहीं आती है। 
 
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Zero Shadow Day - फोटो : iStock
कुछ पल के लिए इंसान समेत किसी भी वस्तु की परझाई नजर नहीं आती है। यह घटना दक्षिणी क्षेत्रों में ही देखी गई है। राजस्थान में ऐसा दृश्य यानी जीरो शेडो नहीं होता है, क्योंकि राजस्थान का लेटीट्यूड 27 है। बिलो 23 लेटीट्यूड वाले इलाकों में ही यह घटना दिखाई देती है।

 
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Zero Shadow Day - फोटो : NASA
हर दिन नहीं दिखता ऐसा नजारा

हर दिन किसी भी वस्तु की परछाई की लंबाई क्षितिज से सूर्य की ऊंचाई पर निर्भर होती है। दिन की शुरुआत में यह लंबी होती है और दिन चढ़ने के साथ ही परछाई छोटी होती जाती है। दोपहर में परछाई सबसे छोटी होती है, लेकिन हर दिन परछाई की लंबाई दोपहर के समय शून्य नहीं होती है। जिस प्रकार की घटना आज हुई है। 

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Zero Shadow Day - फोटो : iStock
साल में दो बार घटती है यह खगोलीय घटना

धरती की घूमने की धूरी के झुकाव की वजह से यह खगोलीय घटना घटती है। सूरज के परिक्रमा तल के लंबवत होने की जगह धरती उससे 23.5 डिग्री तक झुकी होती है। इसकी वजह से सूरज हर दिन आपके ऊपर नहीं आ पाता है, लेकिन साल में दो बार यह घटना घटती है। 

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Zero Shadow Day - फोटो : iStock
इससे पहले बेंगलुरु में 25 अप्रैल को ऐसा नजारा दिखाई दिया था। अप्रैल और अगस्त के महीने में इन दोनों दिन धरती पर कर्क और मकर रेखा के बीच के स्थान पर सूर्य की रोशनी बिल्कुल लंबवत पड़ती है।
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