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Earthquake: भारत की इस जगह पर लगातार आ रहे हैं भूकंप, क्यों हैरान हैं वैज्ञानिक?

Tue, 11 Jul 2023 04:34 PM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Earthquake - फोटो : istock
Why is Gujarat prone to earthquakes: गुजरात प्रांत का एक उपक्षेत्र सौराष्ट्र के नाम से भी जाना जाता है, जो ज्यादातर अर्ध मरुस्थलीय है। सौराष्ट्र वर्तमान में काठियावाड़-प्रदेश है जो एक प्रायद्वीपीय क्षेत्र है। अमूमन सौराष्ट्र की धरती एक सूखा इलाका मानी जाती है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह इलाका अच्छी बरसात की वजह से हरा-भरा हो उठा है। हालांकि काठियावाड़ इस बात ये अंजान था कि यह वरदान इस क्षेत्र के लिए एक तरह का अभिशाप साबित होगा। दरअसल पिछले दो वर्षों में यहां के कई क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 से कम हैं। इस तरह के कम तीव्रता वाले भूकंप के झटकों से यहां के लोगों में घबराहट है। 

हालांकि आइएसआर के एक अध्ययन की मानें तो जरूरी नहीं कि ये हल्के झटके एक बड़े भूकंप के पूर्व-संकेत ही हैं। पर फिर भी भूकंप की भविष्यवाणी करना आज भी मुश्किल है। 
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rain - फोटो : istock
आइएसआर के निदेशक डॉ. सुमेर चोपड़ा का कहना हैं कि गुजरात और आसपास के राज्य "दक्कन चट्टानों" पर हैं, जो बेहद लंबी और कठोर चट्टाने हैं। इनमें कई दरारे भी हैं। टेक्टोनिक सेटअप के कारण प्लेट में हाइड्रोलॉजिकल लोडिंग यानी धरती में पानी के रिसाव की प्रक्रिया हो रही है। ऐसे में बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में 3 से 24 किमी की गहराई के भीतर, कम तीव्रता वाले भूकंप आने का खतरा बना हुआ है।
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desert - फोटो : istock
जामनगर में मानसून के मौसम में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भारी बारिश के बाद जल स्तर 24 मीटर तक बढ़ गया था और 2.0 बार तक दबाव भी बढ़ गया था। ऐसे में पिछले अध्ययन में पता कि तनाव परिवर्तन की वजह से हल्के झटके आ सकते हैं। दरअसल दक्कन के चट्टान बेहद कठोर है, क्योंकि यह लगभग 20 लाख वर्ष ही पुरानी है जो अपेक्षाकृत कम उम्र की है। जबकि हिमालयी प्लेटें करीब 1-1.5 करोड़ वर्ष पुरानी हैं। 
 

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Earthquake - फोटो : istock
अधिक सख्त होने के कारण दक्कन चट्टान कई बार टूट जाती है और इनमें पानी रिसने लगता है, जिससे दबाव बनाता है। 2021 और 2022 के बीच अमरेली जिले के ही कुछ हिस्सों में लगभग 400 हल्के झटके महसूस किए गए, जिसका सिलसिला अभी भी जारी है। 
 
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desert - फोटो : istock
इसके अलावा अन्य क्षेत्र जैसे सौराष्ट्र में भावनगर और जामनगर जिलों के कुछ हिस्से, गिर सोमनाथ में तलाला, दक्षिण गुजरात में नवसारी, महाराष्ट्र में नासिक, पालघर के पास के क्षेत्र और मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से पिछले 15-16 सालों से इस तरह के भूकंपीय झटकों झेल रहे हैं। 
 
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Earthquake - फोटो : istock
आपको बता दें कि बड़े भूकंपों के झटके का मूल दायरा करीब 60- 70 किमी तक होता है। लेकिन हल्के भूकंप के झटके का दायरा लगभग 10 किमी तक होता है। आइएसआर के निदेशक के मुताबिक "इस दौरान कुछ गैस और हाइ चार्ज कण निकलते हैं, जो दबाव बनाते हैं। हालांकि गैसों के रेडियोलॉजिकल अध्ययनों में राहत की बात सामने आई है कि यहां एक बड़े भूकंप का संकेत देने वाली रेडॉन गैस नहीं निकल रही है।
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