गंगा नदी
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एंटिबॉयोटिक की काट
ये वायरस बहुत साधारण होते हैं। ये सिर्फ प्रोटीन से बने होते हैं। जब ये बैक्टीरिया पर हमला करते हैं, तो उसका डीएनए चट कर जाते हैं और अपनी तादाद बढ़ाने लगते हैं। आखिर में बैक्टीरिया में विस्फोट से उसका खात्मा हो जाता है। ऐसे वायरस सिर्फ बैक्टीरिया की खास नस्ल को निशाना बनाते हैं। वहीं एंटीबॉयोटिक मानो एटम बम। जिन पर निशाना लगाया जाता है, वो बैक्टीरिया तो इन एंटीबॉयोटिक से मारे ही जाते हैं। हमारे शरीर में रहने वाले कुछ अच्छे कीटाणु भी इनके शिकार हो जाते हैं।
लेकिन निंजा वायरस, सिर्फ उन्हीं बैक्टीरिया को खत्म करेंगे जो बीमारी फैलाते हैं। यूं तो पश्चिमी देशों में इस पर होने वाली रिसर्च नई है। पर, पूर्वी यूरोपीय देश लंबे अर्से से ऐसे वायरस की मदद से बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। मगर उनकी रिसर्च अंग्रेजी में न छपने की वजह से बाकी दुनिया को उनके बारे में पता नहीं था। हीदर हेंड्रिक्सन बताती हैं कि जॉर्जिया, रूस और पोलैंड में वैज्ञानिकों ने ऐसे वायरस पर काफी रिसर्च की है जो बैक्टीरिया का खात्मा करते हैं। इन देशों ने ऐसे कारगर वायरस की फेहरिस्त भी तैयार की है।