प्रतीकात्मक तस्वीर
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सूरज को सीधे आंखों से ना देखें
इस खूबसूरत दृश्य के बीच सूरज को सीधे आंखों से ना देखें और ना ही इसके लिए दूरबीन का इस्तेमाल करें। इससे आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है या आप अंधे हो सकते हैं। रॉयल म्यूजियम्स ग्रीनिच में खगोल विज्ञानी एडवर्डी ब्लूमर कहते हैं, "सूर्य के प्रकाश के प्रकाशीय गुण पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरते हैं।" सबसे पहले हमें प्रकाश को समझने की जरूरत है, जो दृश्यमान प्रकाश स्पेक्ट्रम के सभी रंगों यानी लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, गहरा नीला और बैंगनी से बना है।
ब्लूमर कहते हैं, ''ये सूरज की रोशनी के बिखरने से जुड़ा है। लेकिन, ये समान रूप से बिखरी हुई नहीं होती।'' हर रंग की अपनी वेवलेंथ होती है, जो उस रंग को वैसे ही दिखाता है, जिस रंग का वो है। उदाहरण के लिए बैंगनी रंग की सबसे छोटी वेवलेंथ होती है जबकि लाल रंग की सबसे लंबी। अब जानते हैं कि वातावरण क्या होता है। विभिन्न गैसों की वो परतें, जो हमारे ग्रह में फैली हुई हैं और जो हमें जिंदा रखती हैं। इसमें ऑक्सीजन भी शामिल है,जिससे हम सांस ले पाते हैं।