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मंगल ग्रह पर आज तक क्यों नहीं पहुंच पाया कोई इंसान? क्या है इसके पीछे का रहस्य

Thu, 26 Dec 2019 06:43 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यूं तो विज्ञान के क्षेत्र में हमने काफी तरक्की कर ली है, लेकिन आज भी कई ऐसी चीजें हैं जो इंसानों के लिए हमेशा से एक चुनौती बनी हुई हैं। ऐसी ही एक चुनौती है मंगल ग्रह पर इंसानों का आज तक न पहुंच पाना। इसके पीछे कई वजहें हैं, जिनके बारे में अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी जिक्र कर चुकी है। 

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नासा ने पिछले साल मंगल ग्रह पर इंसान के पहुंचने के रास्ते में आने वाली मुश्किलों की एक सूची बनाई थी। नासा के मुताबिक ये मुश्किलें हैं- मंगल ग्रह पर विकिरण, अलगाव, धरती से मंगल ग्रह की अधिक दूरी, गुरुत्वाकर्षण और वहां का बंद वातावरण। 
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मंगल पर जाने की सबसे पहली चुनौती विकिरण को लेकर है, जिसे इंसानी आंखों से देखा नहीं जा सकता। चूंकि मंगल का अपना कोई चुम्बकीय क्षेत्र नहीं है, ऐसे में वहां का खतरनाक ब्रह्मांडीय विकिरण (रेडिएशन) इंसानों की आंखों में मोतियाबिंद और यहां तक कि कैंसर का कारण भी बन सकता है।  

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धरती से मंगल ग्रह की दूरी करीब 14 करोड़ मील है। चांद तक पहुंचने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को मुश्किल से तीन दिन की यात्रा करनी पड़ी थी, लेकिन मंगल तक पहुंचने के लिए इंसान को कई महीनों तक सफर करना होगा। यह अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। 
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nasa-mars - फोटो : nasa
अंतरिक्ष यात्रियों को चाहे कितना भी प्रशिक्षण दिया गया हो, लेकिन थोड़े समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद उनके व्यवहार संबंधी परेशानी आने ही लगती है। इसके लिए नासा एक ऐसी टीम की तलाश कर रही है, जिसमें मजाकिया लोग भी हों जो अपना काम बखूबी करें। इसके साथ ही वो पूरी टीम को हंसाते भी रहें, क्योंकि इतने लंबे समय के मिशन में इंसान के अंदर तनाव आ सकता है। 
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nasa-mars - फोटो : nasa
मंगल ग्रह पर इंसानों को अलग तरह के गुरुत्वाकर्षण का भी सामना करना पड़ेगा। धरती पर जिस इंसान का वजन 100 पाउंड यानी 45.3 किलो होगा, मंगल ग्रह पर उसी का वजन 38 पाउंड यानी 17.2 किलो हो जाएगा। 
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मंगल ग्रह
मंगल का तापमान और दबाव भी इंसानों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। पृथ्वी के मुकाबले ठंड, धूल भरी आंधी और बवंडर, मंगल ग्रह पर कहीं ज्यादा हैं। गर्मियों में मंगल ग्रह का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहता है, लेकिन सर्दियों में यही तापमान -140 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। 

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red planet - फोटो : Mars One
चूंकि इंसानों के जिंदा रहने के लिए सबसे जरूरी है ऑक्सीजन, लेकिन मंगल ग्रह पर इसकी भारी कमी है। मंगल के वातारण में 96 फीसदी कार्बन डाई ऑक्साइड है, 1.93 फीसदी आर्गन, 0.14 फीसदी ऑक्सीजन और 2 फीसदी नाइट्रोजन है। साथ ही यहां के वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड के निशान भी पाए गए हैं। ऐसे में वहां पर कोई भी इंसान महज कुछ घंटों तक ही जिंदा रह पाएगा। 
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mars - फोटो : social media
हालांकि नासा का कहना है कि साल 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों का एक दल मंगल ग्रह पर कदम रखेगा। वहीं, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी 'ईएसए' भी साल 2050 तक अपने एक ऐसे ही अभियान को संभव मानती है। 
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