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ज्ञान की बात: जानिए इंसान की आंखों से आंसू कैसे और क्यों आते हैं?

Sun, 13 Jun 2021 10:56 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इंसान के रोने के पीछे पूरी तरह से विज्ञान काम करता है। आपको बता दें कि इंसानों के आंखों से आंसू किसी दुख, परेशानी या बेहद खुशी के मौके पर ही नहीं आते हैं, बल्कि ये किसी खास गंध या चेहरे पर तेज हवा के लगने के वजह से भी आते हैं। वहीं प्याज काटने पर आंसुओं का निकलना आम बात है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि हमारे आंखों से आंसू क्यों और कैसे आते हैं?
 
आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने आंसुओं को मुख्य रूप से तीन श्रेणी में बांटा है। आंसुओं की पहली श्रेणी है बेसल। ये नॉन-इमोशनल आंसू होते हैं, जो आंखों को सूखा होने से बचाते हुए स्वस्थ रखते हैं। दूसरी श्रेणी में भी नॉन-इमोशनल आंसू ही आते हैं। ये आंसू किसी खास गंध पर प्रतिक्रिया से आते हैं, जैसे प्याज काटने या फिनाइल जैसी तेज गंध पर आने वाले आंसू।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
आंसुओं की तीसरी श्रेणी पर हमेशा चर्चा होती रहती है। इसे क्राइंग आंसू कहते हैं। क्राइंग आंसू भावनात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर आते हैं। इंसान के मस्तिष्क में एक लिंबिक सिस्टम होता है, जिसमें ब्रेन का हाइपोथैलेमस होता है। यह हिस्सा नर्वस सिस्टम से सीधे संपर्क में रहता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
इस सिस्टम का न्यूरोट्रांसमिटर संकेत देता है और किसी भावना के एक्सट्रीम पर हम रो पड़ते हैं। इंसान केवल दुख में ही नहीं, बल्कि गुस्सा या डर होने पर भी रोने लगता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
आखिर इंसान रोता क्यों है?
इंसान का रोना नॉन-वर्बल संवाद का एक तरीका है। आंसुओं के जरिए इंसान ये बताता है कि हमें मदद की जरूरत है। बता दें कि मनोवैज्ञानिक इस बात पर लगातार जोर देते हैं कि भावनाओं के उबाल में रोना अच्छा होता है। इससे आंखें ही नहीं, बल्कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
नॉन-वर्बल संवाद का सबसे सही उदाहरण नवजात बच्चे होते हैं। बच्चे जब भाषा नहीं जानते हैं, तो रोने के माध्यम से नॉन-वर्बल संवाद करते हैं और अपनी जरूरतों को बताते हैं।
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