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Weird Traditions: भारत में यहां पर शादी के लिए लड़कों को पीटती हैं महिलाएं, जानिए अजीब परंपरा के बारे में...

Tue, 25 Jul 2023 12:08 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Weird Traditions - फोटो : iStock
Weird Traditions: दुनिया के हर देश में शादी के अलग-अलग रीति रिवाज होते हैं। कुछ परंपराएं बेहद खास होती हैं, जबकि कुछ बेहद हैरान करने वाले होती हैं। भारत विविधताओं का देश हैं और यहां पर अलग-अलग संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। देश के हर राज्य में शादी की अलग-अलग परंपराओं का पालन किया जाता है। ऐसी ही एक परंपरा का पालन राजस्थान के जोधपुर में किया जाता है। 

जोधपुर में एक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें सिर्फ महिलाओं का ही राज है। दुनिया का यह अनोखा मेला 16 दिनों तक चलता है। मेले के बाद सुहागिन महिलाएं पूरी रात सड़कों पर निकलकर बेंत से पुरुषों को पीटती हैं। मेले की सबसे खास बात यह है कि पुरुष खुद ही पीटते हैं और कोई बुरा नहीं मानता है। इस अनोखे मेले को बेंतमार मेले के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस अनोखे रीति रिवाज के बारे में...

 
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Weird Traditions - फोटो : iStock
बताया जाता है कि जोधपुर में प्राचीन समय से यह परंपरा चलती आ रही है। इस परंपरा में भाभी अपने देवर और दूसरे कुंवारे लड़कों को प्यार से छड़ी मारकर बताती हैं कि यह कुंवारा है। मान्यता है कि बेंत मारने से कुंवारे लड़कों की जल्द शादी हो जाती है। 
 
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Weird Traditions - फोटो : iStock
जोधपुर में आयोजित होने वाले इस मेले का नाम धींगा गवर है। मेले के दौरान 16 दिन तक गवर माता की पूजा की जाती है। फिर 16वें दिन महिलाएं पूरी रात घर से बाहर रहती हैं। अलग-अलग समय पर धींगा गवर की आरती करती हैं। इस मेले की खास बात यह है कि इसमें विधवा महिलाएं भी भाग लेती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से परिवारों में सुख-समृद्धि आती है।
 

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Weird Traditions - फोटो : iStock
16 दिन तक चलने में वाले मेले में हर दिन धींगा गवर माता की पूजा की जाती है। पूजा करने वाली महिलाएं 12 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं और दिन में सिर्फ एक बार खाना खाती हैं। चैत्र शुक्ल की तृतीया से इस पूजा की शुरुआत होती है और बैसाख कृष्ण पक्ष की तृतीया तक यह चलता है। 


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Weird Traditions - फोटो : iStock
पूजा में महिलाएं पहले दीवारों पर गवर की कलाकृति बनाती हैं। कच्चे रंग से भगवान शिव, गणेश जी, मूषक, सूर्य, चंद्रमा और गगरी लिए महिला का भी चित्र बनाया जाता है। इसमें 16 अंकों का खास महत्व होता है और 16 महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं। यह संख्या न घटाई जा सकती है और न ही बढ़ाई जा सकती है।


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Weird Traditions - फोटो : iStock
564 साल पुरानी है परंपरा

राव जोधा ने 1459 में जोधपुर की स्थापना की थी। मान्यता है कि तभी से ही धींगा गवर पूजा शुरू हुई थी। राज परिवार ने इस पूजा की परंपरा की शुरुआत की थी। 564 सालों से यह पूजा चलती आ रही है।
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