हर देश और समाज में दोहरे मायनों या द्विअर्थी बातों का चलन होता है। बहुत से ऐसे जुमले हमारे समाज में भी चलते हैं, जो दोहरे मतलब वाले होते हैं। खास तौर से ऐसी बातें, जो सब के सामने न की जा सकें। जैसे, सेक्स को लेकर हमारी सोच। अक्सर लोग सेक्स के बारे में इशारों में बातें करते हैं। स्लैंग यानी अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करने से बचते हैं। ऐसे मौकों के लिए द्विअर्थी जुमले काम में लाए जाते हैं। पर, आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि ऐसे द्विअर्थी संवाद को एक देश अपनी सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर देखता है। इस देश का नाम है मेक्सिको। लैटिन अमरीकी देश मेक्सिको में स्पेनिश भाषा बोली जाती है। ये देश सैकड़ों साल तक स्पेन का गुलाम रहा था। मेक्सिको की कई खूबियां हैं। मगर दोहरे मतलब वाली बातों के लिए ये देश खास तौर से मशहूर है। यूं तो मेक्सिको चिली यानी मिर्च के लिए भी मशहूर है। एक से एक तीखी, तेज मिर्चें यहां उगाई जाती हैं। पर, मिर्चों को लेकर यहां तमाम जुमलेबाजियां चलती हैं।
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इस लेख को लिखने वाली सुजाना रिग ब्रिटेन की रहने वाली हैं। वो मेक्सिको में रहते-रहते स्पेनिश जबान अच्छे से सीख गई हैं। मगर उन्हें दोहरे मायनों वाली जुमलेबाजी नहीं आती। सो, एक रोज जब वो रेस्टोरेंट में गईं, तो वेटर ने सुजाना से पूछा कि क्या आप मसालेदार खाना पसंद करती हैं? मगर इस बात को पूछने के लिए उस वेटर ने सुजाना से घुमा-फिरा कर कई सवाल कर डाले।
वो किस देश की रहने वाली हैं। कौन सी भाषा बोलती हैं। इंग्लैंड में वो कहां की रहने वाली हैं। फिर आखिर में वेटर ने सुजाना से पूछा कि क्या आप मसालेदार खाना खाती हैं? इसका जवाब हां में मिलने पर वेटर मुस्कुराता हुआ उनके पास से चला गया। सुजाना को समझ न आया कि आखिर क्या बात है? इसके बाद एक वाकिया और हुआ। सुजाना अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने गईं। बात मेक्सिको के ओक्साका शहर की है। दोस्तों ने सुजाना से मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या उन्हें मिर्चें पसंद हैं?
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सुजना का डर
वेटर के साथ हुई बातचीत के तजुर्बे के बाद सुजाना फौरन बोल पड़ीं। कहा कि 'हां मुझे मिर्चें पसंद हैं'। इसके बाद उन्होंने मिर्चों की तारीफ में और भी बहुत कुछ कहा, और जब वो मिर्चों को लेकर अपने लगाव का बखान कर रही थीं, तो सुजाना के दोस्त हंस-हंसकर लोट-पोट हुए जा रहे थे। सुजाना को समझ में नहीं आया कि इसमें इतना हंसने वाली बात क्या है, लेकिन उनके दोस्त तो हंस-हंसकर रोने की हालत में पहुंच गए थे।
सुजाना ने मुस्कुराते हुए अपनी कही बातों पर गौर किया। समझना चाहा कि कहीं गलती से उन्होंने स्पेनिश में कुछ ऊटपटांग तो नहीं कह दिया। उन्हें अपनी बातों में ऐसा कुछ नजर नहीं आया। इस बीच, उनके एक मेक्सिकन दोस्त ने हंसी रोकते हुए पूछा कि, 'क्या तुम्हें वाकई मेक्सिकन मिर्च बहुत पसंद है?' इसके बाद सभी लोग फिर से जोर-जोर से हंसने लगे। अचानक सुजाना को खयाल आया कि उन्होंने मिर्च शब्द का इस्तेमाल किया था, और इसका दूसरा मतलब भी हो सकता है। वो शर्म से लाल हो गईं। जबकि दोस्त हंसते-हंसते पागल हो रहे थे।
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Mexico
शब्दों की बाजीगरी
असल में सुजाना मेक्सिको की संस्कृति के एक खास चलन 'एल्बर' का शिकार हो गई थीं। एल्बर मेक्सिको में बात करने का वो ढंग है, जिसमें किसी भी वाक्य के दोहरे या कई मायने होते हैं। शब्दों की ये बाजीगरी मेक्सिको में खूब चलती है। हिंदुस्तान की तरह ही मेक्सिको में सेक्स को लेकर लोग खुलकर बात करने से कतराते हैं। ऐसे में वो एल्बर यानी दोहरे मतलब वाले वाक्यों का सहारा लेते हैं। ये बात सुजाना को समझाई मोरेलोस यूनिवर्सिटी की भाषा की प्रोफेसर डॉक्टर लुसिल हेरास्ती ने।
डॉक्टर हेरास्ती ने कहा कि सेक्स से जुड़ी बात के लिए दोहरे मतलब वाले जुमले मेक्सिको में खूब इस्तेमाल होते हैं। उन्होंने समझाया कि मिर्च का मतलब लिंग भी होता है। तब जाकर सुजाना को अपने दोस्तों के साथ हुई बातचीत और उनकी हंसी का राज समझ में आया। अब जो कोई मेक्सिको में एल्बर के चलन से वाकिफ न हो, तो, वो मिर्चों से सालसा बनाने से लेकर मिर्चों से अपने लगाव की बातें नासमझी में कहेगा। वहीं दोहरे मतलब निकालने वाले मिर्चों के प्रति किसी के लगाव का दूसरा ही मतलब निकाल कर हंसेंगे।
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मेक्सिकन कला
यूं तो हर देश में ऐसे द्विअर्थी जुमले खूब चलते हैं। किसी चीज के दोहरे मायने निकाले जाते हैं। सेक्स की बातें ऐसे ही शब्दों के खेल करते हुए की जाती हैं। मगर मेक्सिको ने तो इसे बाकायदा अपनी संस्कृति की पहचान और अटूट हिस्सा बना लिया है। लोग इनकी मदद से इशारों में गालियां भी दे लेते हैं और मजे से बातें भी कर लेते हैं। डॉक्टर लुसिल हेरास्ती इसे मेक्सिकन कला कहती हैं। वो कहती हैं कि जबान पर अच्छी पकड़ रखने वाले ही ऐसा कर सकते हैं।
ऐसे में जब कोई बाहरी मेक्सिको आता है, तो उसे ये कला समझने में वक्त लगता है। इस दौरान वो कई बार दोस्तों के मजाक का निशाना बन जाता है। ओक्साका में मेक्सिको की गाली-गलौज वाली भाषा की ट्रेनिंग देने वाले ग्रेगोरियो डेस्गारेनेस कहते हैं कि किसी के लिए भी अपनी मातृ भाषा के सिवा दूसरी भाषा के स्लैंग सीखने में दिक्कत होती है। ऐसे में मेक्सिकन एल्बर्स को समझना और भी मुश्किल हो जाता है। कई बार तो ये इतने गहरे मायने वाली बातें लिए होते हैं कि खुद मेक्सिको के लोग उनका मतलब नहीं समझ पाते।
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कैसे शुरू हुई द्विअर्थी बातों का चलन
एल्बर की शुरुआत कब हुई। ये चलन मेक्सिको में कहां से आया, कहना मुश्किल है। डॉक्टर हेरास्ती कहती हैं कि ये दोहरे जुमले मध्य मेक्सिको की खदानों में काम करने वालों ने सबसे पहले बोलने शुरू किए थे। घंटों खदान में काम करते करते बोर हो चुके लोगों ने अपने मनोरंजन के लिए ये बोल-चाल शुरू की थी। वहीं, मेक्सिको के कुछ भाषाविदों का मानना है कि इसकी शुरुआत मेक्सिको के मूल निवासियों ने स्पेन के कब्जे के दौरान की थी। इस तरह दोहरे मतलब वाले जुमलों से वो स्पेनिश साम्राज्य के निजाम को धोखा देते थे, क्योंकि मेक्सिको के मूल निवासियों पर भी स्पेनिश जबान थोपी गई थी।
सो उन्होंने आपस में राजदाराना बातें करने के लिए ये तरीका निकाल लिया। ग्रेगोरियो डेस्गारेन्स कहते हैं कि असल में एल्बर, समाज के निचले तबके के लोगों की ऊंचे दर्जे वाले लोगों को चुनौती है। वो बताते हैं कि हम समाज के निचले तबके से हैं, लेकिन हमारा भी उतना ही हक बनता है। वहीं, अगर दो एल्बर बोलने वाले लोग मिलते हैं, तो बहुत जल्द उनमें अपनापन हो जाता है, क्योंकि वो समाज के एक ही तबके से ताल्लुक रखने वाले होते हैं।
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द्विअर्थी जुमलों का मुकाबला
आज मेक्सिको में दोहरे मतलब वाले जुमलों का इतना चलन हो गया है कि इसका बाकायदा मुकाबला होता है। इसमें हर साल 'एल्ब्यूरेरोस' यानी द्विअर्थी जुमलों का उस्ताद चुना जाता है। बरसों तक इस पर मर्दों का ही कब्जा रहा था। मगर 20 साल पहले लॉर्ड्स रुइज नाम की महिला ने पहली बार इस खिताब को जीता। उसके बाद से आज तक उनसे ये ताज कोई नहीं छीन सका है।
आज तो लॉर्ड्स रुइज मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में एल्बर सीखने की कोचिंग देती हैं। उन्हें क्वीन ऑफ एल्बर का खिताब मिला हुआ है। मेक्सिको में एल्बर बोलने वालों को डिप्लोमा भी दिया जाता है। आज रुइज के साथ और भी लड़कियां, दूसरे लोगों को एल्बर बोलना सिखा रही हैं। उनकी नजर में ये दिमागी शतरंज का खेल है। जानकार कहते हैं कि मेक्सिको के कामकाजी तबके के लिए आज एल्बर सशक्तिकरण का जरिया बन गए हैं।
देश की पहचान
मेक्सिको के कुछ लोग एल्बर को कविता के तौर पर देखते हैं। वहीं कुछ के लिए ये अश्लील और बदजुबानी है। 2014 से 2016 के बीच मेक्सिको में ये अफवाह फैल गई कि यूनेस्को ने इसे सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है। हालांकि ये अफवाह गलत साबित हुई, लेकिन इससे मेक्सिको में एल्बर को लेकर नई बहस छिड़ गई।
एक सर्वे के मुताबिक केवल 21 फीसद मेक्सिकन ये मानते हैं कि एल्बर उनके देश की पहचान है। अब मेक्सिको के लोग इस पर बहस करते रहें कि आखिर एल्बर को वो कौन सा दर्जा देना चाहते हैं। मगर आम विदेशी नागरिक के लिए मेक्सिको का ये चलन चौंकाने वाला भी है और परेशान करने वाला, और जो कहीं आप एल्बर बोलना सीख गए, तो आप मजे भी ले सकते हैं। तो कभी जाइए मेक्सिको, 'द्विअर्थी जुमलों' के मजे चखने के लिए!