2010 में हुई शुरुआत
इस पीढ़ी की शुरुआत 2010 में पैदा हुए बच्चों से मानी जाती है। उस साल आईपैड और इंस्टाग्राम लॉन्च हुए थे। 2025 में इस पीढ़ी के औपचारिक तौर पर समाप्त होने तक इसमें 2 अरब सदस्य शामिल हो जाएंगे। इन उत्पादों की मदद से मां-बाप नर्सरी से लगातार जुड़े रहते हैं। उनको बोतल, डमी, कॉट, प्रैम, कपड़े वगैरह के फीडबैक लगातार मिलते रहते हैं।
इनमें से कुछ उत्पाद मां-बाप के तनाव को कम करते हैं तो कुछ दूसरे उत्पाद परवरिश के उन हिस्सों को पूरी तरह स्वचालित बना देते हैं, जिनके लिए मां-बाप पहले अनुभूतियों पर निर्भर रहते थे। उदाहरण के लिए दूध के बोतल की पेंदी से जुड़ा 'इंटेलीजेंट बेबी फीडिंग मॉनिटर' ब्लूटूथ से स्मार्टफ़ोन को डेटा भेजता है। बच्चे को दूध पिलाने के लिए मां पहले अपने अनुभव पर निर्भर रहती थीं। अब दूध की मात्रा, समय, उसके तापमान और बोतल के कोण तक को ऐप्स से नियंत्रित किया जाता है।