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अजब-गजब: बेहद दुर्लभ जानवर है 'एशियन यूनीकॉर्न', आज तक नहीं आया नजर, जानिए अब क्यों खोज रहे वैज्ञानिक

Tue, 11 Jan 2022 07:15 PM IST
राजेश मिश्रा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अति दुर्लभ वन्यजीव सा ओला - फोटो : Twitter/@KnowledgeZoneln
वर्ष 1992 में वैज्ञानिकों ने एक अति- दुर्लभ जानवर की खोज की थी। इस जानवर का नाम साओला था। बीते 50 सालों से अधिक समय से इस प्रजाति के जानवर को किसी ने नहीं देखा है। सबूत के तौर पर इस जीव के कुछ वीडियो क्लिप्स ही वैज्ञानिकों के पास हैं जो 1992 में वियतनाम में तब रिकॉर्ड किए गए थे जब वन्यजीवों का सर्वे किया जा रहा था। जीवविज्ञानी "डो टूओक" को "वी क्वांग नेचर रिजर्व" में किसी अज्ञात जानवर का कंकाल मिला जिसमें दो खोपड़ियां और एक सींग थी। जांच में पाया गया कि ये कंकाल बिल्कुल साओला की तरह ही लग रहे थे। अब इस खूबसूरत वन्यजीव के न दिखाई देने के पीछे जीव विज्ञानी सबसे बड़ा कारण वन्यजीवों का अंधाधुंध व्यावसायिक अवैध शिकार मानते हैं जिससे साओला की जनसंख्या पर बहुत बुरा असर पड़ा और ये धीरे-धीरे घटती चली गई। आइए जानते हैं इस जीव से जुड़ी हुई और ज्यादा जानकारी 
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अति दुर्लभ वन्यजीव सा ओला - फोटो : Twitter/@BrowserWild
इस खोज को 20वीं शताब्दी की सबसे शानदार प्राणी खोजों में से एक माना जाता है। साओला के संरक्षण के लिए साओला वर्किंग ग्रुप की स्थापना साल 2006 में की गई जिससे विलुप्त हो रहे इस वन्यजीव को बचाया जा सके। इस ग्रुप को इसलिए बनाया गया था जिससे प्रजनन के लिए जंगल में बचे अंतिम जांनवर को ढूंढने में मदद मिल सके, जिससे इस जानवर की जनसंख्या में वृद्धि हो सके और इस तरह के प्रयास से साओला को दोबारा जंगल में देखा जा सकता है। 
 
 
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अति दुर्लभ वन्यजीव सा ओला - फोटो : Twitter/@BrowserWild
यह संगठन जमीनी स्तर पर इस वन्य जीव को बचाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए संगठन स्थानीय लोगों में जागरूकता लाने और उनसे जरूरी जानकारी इकट्ठा करने का काम करता है। ये दूसरे भी वन्य जीव संरक्षण दलों को अपने साथ जोड़ता है जिससे विलुप्त हो रहे जीवों को बचाने में मदद हो सके। 'एशियन यूनिकॉर्न' यानी साओला इतने दुर्लभ जीव हैं कि अभी तक SWG को एक भी जानवर नहीं मिल पाया है।

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अति दुर्लभ वन्यजीव सा ओला - फोटो : Twitter/@KnowledgeZoneln
इस संगठन ने वर्ष 2017 और 2019 के बीच में लाओस में खाॅं जे नोंगमा में 300 कैमरे लगा कर इस जीव को खोजने का प्रयास किया था, लेकिन कोई भी सफलता हाथ नहीं लगी। लाओस में खॉं जे नोंगमा एक राष्ट्रीय संरक्षित क्षेत्र है जो 11 वर्ग मील तक फैला हुआ है। 
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अति दुर्लभ वन्यजीव सा ओला - फोटो : Twitter/@KnowledgeZoneln
300 कैमरों में एक भी तस्वीर नहीं 
 
ये बहुत ही अफसोस की बात है कि इतने सारे कैमरे लगाने के बाद भी साओला एक भी तस्वीर में नहीं दिखाई दिया। इन विलुप्त हो रहे जीवों को खोजना भी एक कठिन काम है, क्योंकि संसाधन इतने सीमित हैं कि लगातार खोज करना संभव नहीं है। कहीं तकनीक तो कहीं मैन पावर की कमी है। कैमरा एक बड़े क्षेत्र में फैले अलग-अलग जानवरों का पता लगाने में सक्षम नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2020 के अगस्त माह में प्रजाति जीवन रक्षा आयोग ICUN ने इस प्राणी की खोज के लिए अधिक से अधिक निवेश करने की अपील की थी। 
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