धीरूभाई अंबानी
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कहा जाता है कि धीरूभाई अंबानी पहले फल और नाश्ता बेचने का काम करते थे, लेकिन इससे उनको कुछ खास फायदा नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने ये काम छोड़कर पकौड़े बेचना शुरू किया। हालांकि ये व्यवसाय भी उन्हें रास नहीं आया, जिसके बाद उन्होंने इस काम को भी बंद कर दिया और पिता की सलाह पर नौकरी करने की सोची। इसके लिए वो यमन चले गए और वहां एक पेट्रोल पंप पर 300 रुपये प्रति महीने की नौकरी करने लगे। वहां महज दो साल ही नौकरी करने के बाद अपनी काबिलियत के दम पर वो प्रबंधक बन गए, लेकिन एक बिजनेसमैन बनने की ललक उन्हें वापस भारत खींच लाई।