फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन 15 परंपराओं को ढकोसला मत कहें, वैज्ञानिक तर्क दंग कर देंगे आपको

Wed, 01 Nov 2017 07:59 AM IST
amarujala.com- Presented by: राजेश सैनी
विज्ञापन
1 of 16
demo
भारत में अनगिनत परम्पराएं हैं। इनमें कुछ ऐसी परम्पराएं भी हैं जिन्हें देख तमाम लोग ताज्जुब मानते हैं तो कई इन पर हंसते भी हैं। यहां तक की कई तो इन्हें ढकोसला तक कह देते हैं। लेकिन इन परम्पराओं को ढकोसला कहने वालों की सोच शायद यह लेख पढ़कर बदल जायेगी। जी हां, क्योंकि हम बताने जा रहे हैं हिंदू परम्पराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारण...

अगर भविष्य में कोई आपसे यह पूछेगा कि महिलाएं बिछिया क्यों पहनती हैं, हाथ जोड़कर नमस्ते क्यों किया जाता है या व्रत रखकर खुदको कष्ट क्यों दिया जाता है तो आप उसका सही तर्क दे सकेंगे। तो चलिये स्लाइडर में पढ़ते हैं...

 
विज्ञापन

2 of 16
demo
चूड़ी पहनना 
wittyfeed.com  की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाएं हाथों में चूड़ियां पहनती हैं। वैज्ञानिक तर्क- हाथों में चूड़ियां पहनने से त्वचा और चूड़ी के बीच जब घर्षण होता है, तो उसमें एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है, यह ऊर्जा शरीर के रक्त संचार को नियंत्रित करती है। साथ ही ढेर सारी चूड़ियां होने की वजह से वो ऊर्जा बाहर निकलने के बजाये, शरीर के अंदर चली जाती है। 

 
विज्ञापन

3 of 16
demo
क्यों लगाया जाता है सिंदूर 
शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। वैज्ञानिक तर्क- सिंदूर में हल्दी, चूना और मरकरी होता है। यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। चूंकि इससे यौन उत्तेजनाएं भी बढ़ती हैं, इसीलिये विधवा औरतों के लिये सिंदूर लगाना वर्जित है। इससे स्ट्रेस कम होता है। तुलसी के पेड़ की पूजा तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है। वैज्ञानिक तर्क- तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं। 

 

4 of 16
demo
मूर्ति पूजन 
हिंदू धर्म में मूर्ति का पूजन किया जाता है। वैज्ञानिक तर्क- यरि आप पूजा करते वक्त कुछ भी सामने नहीं रखेंगे तो आपका मन अलग-अलग वस्तु पर भटकेगा। यदि सामने एक मूर्ति होगी, तो आपका मन स्थ‍िर रहेगा और आप एकाग्रता ठीक ढंग से पूजन कर सकेंगे। 

 
विज्ञापन

5 of 16
demo
चरण स्पर्श करना 
हिंदू मान्यता के अनुसार जब भी आप किसी बड़े से मिलें, तो उसके चरण स्पर्श करें। यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं, ताकि वे बड़ों का आदर करें। वैज्ञानिक तर्क- मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए एक चक्र पूरा करती है। इसे कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं। इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है, या तो बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक या फिर छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक। 

 
विज्ञापन

6 of 16
demo
व्रत रखना 
कोई भी पूजा-पाठ या त्योहार होता है, तो लोग व्रत रखते हैं। वैज्ञानिक तर्क- आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है, यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते। 

 
विज्ञापन

7 of 16
demo
नदियों में क्यों फेंके जाते हैं सिक्के
नदियों में सिक्कों को फेंकने की एक पुरानी हिंदू परंपरा रही है। वैज्ञानिक तर्क- इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि हमारे पूर्वज पुराने समय में तांबे के सिक्के नदी में फेंका करते थे। दरअसल, तांबा एक मौलिक धातु है जो पानी में मिलकर उसे मानव शरीर के लिए फायदेमंद बनाता है। ये नदि को जल को दूषित होने से बचाते थे।


 

8 of 16
demo
हाथ जोड़कर नमस्ते करना 
जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं। वैज्ञानिक तर्क- जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा। 

 

9 of 16
demo
महिलाएं क्यों पहनती हैं बिछिया 
हमारे देश में शदीशुदा महिलाएं बिछिया पहनती हैं। वैज्ञानिक तर्क- पैर की दूसरी उंगली में चांदी का बिछिया पहना जाता है और उसकी नस का कनेक्शन बच्चेदानी से होता है। बिछिया पहनने से बच्चेदानी तक पहुंचने वाला रक्त का प्रवाह सही बना रहता है। इसे बच्चेदानी स्वस्थ्य बनी रहती है और मासिक धर्म नियमित रहता है। चांदी पृथ्वी से ऊर्जा को ग्रहण करती है और उसका संचार महिला के शरीर में करती है।

 

10 of 16
demo
माथे पर कुमकुम/तिलक 
महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं। वैज्ञानिक तर्क- आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोशिकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है।

 

11 of 16
demo
सिर पर चोटी 
हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं। वैज्ञानिक तर्क- जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।
 
 

12 of 16
demo
दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना 
दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है, तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आ जायेगा, आदि। इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें। वैज्ञानिक तर्क- जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है। 
 

13 of 16
demo
सूर्य नमस्कार 
हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा है। वैज्ञानिक तर्क- पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है। 

 

14 of 16
demo
कान छिदवाने की परम्परा 
भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। वैज्ञानिक तर्क- दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है। 

 

15 of 16
demo
इसलिए बजता है मंदिर में घंटा 
हिंदू मान्यता के अनुसार मंदिर में प्रवेश करते वक्त घंटा बजाना शुभ होता है। इससे बुरी शक्त‍ियां दूर भागती हैं। वैज्ञानिक तर्क-घंटे की ध्वनि हमारे मस्त‍िष्क में विपरीत तरंगों को दूर करती हैं और इससे पूजा के लिय एकाग्रता बनती है। घंटे की आवाज़ 7 सेकेंड तक हमारे दिमाग में ईको करती है और इससे हमारे शरीर के सात उपचारात्मक केंद्र खुल जाते हैं। हमारे दिमाग से नकारात्मक सोच भाग जाती है। 

 
विज्ञापन

16 of 16
demo
भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से 
जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। वैज्ञानिक तर्क- तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें