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Science News: धरती के पास घूम रहा चांद से टूटा टुकड़ा? वैज्ञानिकों ने नए अध्ययन में किया चौंकाने वाला खुलासा

Sat, 28 Oct 2023 06:20 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Chunk Of The Moon Appears To Be Orbiting Near Earth - फोटो : iStock
Science News: अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिक सालों से शोध कर रहे हैं। इस दौरान वैज्ञानिक कई चौंकाने वाला खुलासा करते हैं। अब खगोलविदों ने बताया है कि धरती के पास का एक एस्टेरॉयड चांद का एक टूटा हुआ टुकड़ा है। उनको इस बात का सबूत मिला है। इस एस्टेरॉयड का नाम कामोओलेवा, जिसका अर्थ चलता हुआ टुकड़ा है। यह चट्टान का टुकड़ा एक पहिए के आकार का है। यह एस्टेरॉयड अप्रैल के महीने में धरती से 14.4 मिलियन किलोमीटर के अंदर परिक्रमा करता है। 

खगोलविदों ने साल 2016 में इसकी खोज की थी। इसके बाद वैज्ञानिक अब इस चट्टान को देखकर हैरान हैं। उनको साल 2021 में पता चला कि कामोओलेवा की बनावट चांद की तरह है। इसकी वजह से इसको चांद का टुकड़ा कहा गया है। कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट जर्नल में 23 अक्तूबर को एक नया अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में कहा गया है कि पुराने एस्टेरॉयड का प्रभाव अंतरिक्ष की चट्टान को उसके वर्तमान ट्रेजिक्ट्री से धकेल सकता है। 

 
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Chunk Of The Moon Appears To Be Orbiting Near Earth - फोटो : iStock
इससे सौर मंडल के चारों तरफ अधिक चंद्रमा जैसे टुकड़े तैर सकते हैं। इस अध्ययन को एरिजोना विश्वविद्यालय के प्लेनेट्री वैज्ञानिक रेनू मल्होत्रा ने लिखी है। रेनू मल्होत्रा ने कहा कि अब यह स्थापित कर रहे हैं कि चंद्रमा ही कामोओलेवा का अधिक संभावित स्रोत है।
 
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Chunk Of The Moon Appears To Be Orbiting Near Earth - फोटो : iStock
अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

रेनू मल्होत्रा ने बताया कि दो असामान्य ऑर्बिटल प्रोपर्टीज को देखने के बाद कामोओलेवा की जांच करने के लिए खगोलविद आकर्षित हुए। पहली बात यह है कि अर्ध-उपग्रह के रूप में यह धरती के इतने करीब मौजूद है कि इसकी परिक्रमा करता प्रतीत होता है। हालांकि इसका असली ऑर्बिटल पार्टनर सूर्य है। दूसरी बात यह है कि इस एस्टेरॉयड के लाखों साल तक धरती के करीब चिपके रहने की संभावना है, तो वहीं धरती के निकट की कई वस्तुएं सिर्फ दशकों तक ही पास रहती हैं।

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Chunk Of The Moon Appears To Be Orbiting Near Earth - फोटो : iStock
साल 2021 में खगोलविदों ने एस्टेरॉयड के स्पेक्ट्रा का विश्लेषण किया, तो पाया कि एस्टेरॉयड का निर्माण संभवत चंद्रमा की चट्टान से हुआ था। अध्ययन में मल्होत्रा को पता चला कि कामोओलेवा के स्पेक्ट्रम को सिर्फ इसलिए देखा, क्योंकि यह एक असामान्य कक्षा में था। 

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Chunk Of The Moon Appears To Be Orbiting Near Earth - फोटो : iStock
यह एस्टेरॉयड धरती के पास था, जिसकी वजह से खगोलविदों ने इसके स्पेक्ट्रम को खोजने के बारे में सोचा। इसके साथ ही हमें कामों के बारे में नहीं पता चलता। शोधकर्ताओं ने बताया कि उनके निष्कर्ष से उन्हें धरती के निकट खतरनाक एस्टेरॉयड की बेहतर समझ मिल सकती है। उनका अगला कदम उन स्थितियों के बारे में जावकारी हासिल करना होगा, जो चट्टान को उसकी कक्षा में धकेल सकती हैं और यह पता लगाना होगा कि वास्तव में प्रभाव कब हुआ था।
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