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Kumbh Mela 2019: महाशिवरात्रि को होगा कुंभ का समापन, गिनीज विश्व बुक में कई रिकार्ड किए अपने नाम

Sun, 03 Mar 2019 06:17 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Kumbh 2019
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला कुंभ अपने अंतिम पड़ाव पर है। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला प्रयागराज कुंभ में आखिरी शाही स्नान महाशिवरात्रि (4 मार्च 2019) के बाद औपचारिक तौर पर समाप्त हो जाएगा। इस बार कुंभ मेले में कई रिकॉर्ड भी बनाए गए हैं। कुंभ में पिछले कई दिनों में लगातार 3 रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज हुए हैं। 
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- फोटो : kumbh.gov.in
15 जनवरी से कुंभ मेला शुरू हुआ था। अबकी बार इस मेले में करीब 10 लाख से भी ज्यादा विदेशी नागरिक शामिल हुए हैं। यूपी सरकार कुंभ 2019 को अब तक का सबसे दिव्य और भव्य कुंभ बता रही है। इस बार कुंभ की थीम- 'स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ' है। प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले (Kumbh Mela) में 1 फरवरी को विश्व रिकार्ड दर्ज किया गया। कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर 1 में हजारों की संख्या में 8 घंटे तक लगातार छात्र-छात्राएं और आम नागरिकों ने पेंट माई वाल के तहत अपने हाथों के रंग-बिरंगे छाप से 'जय गंगे' थीम की पेंटिंग बनाई। इस दौरान गिनीज विश्व बुक रिकार्ड के निर्णायक मंडल के प्रमुख ऋषिनाथ की टीम ने पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग में लगे रहे। मेला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इसके पहले सियोल (साउथ कोरिया) में 4675 लोगों के एक वाल पर पेंटिंग करने का रिकॉर्ड था।


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- फोटो : Social Media
कुंभ मेले में यात्रियों की निःशुल्क सेवा के लिए लगाई गईं 500 से अधिक शटल बसों ने 28 फरवरी को एक साथ परेड कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले सबसे बड़े बेड़े का रिकॉर्ड अबु धाबी के नाम था जहां दिसंबर, 2010 में 390 बसों ने परेड कर रिकॉर्ड बनाया था। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिनिर्णायक (एडजुटीकेटर) ऋषि नाथ ने यहां मेला क्षेत्र स्थित आईसीसीसी सभागार में बताया कि परेड के लिए 510 बसें लगाई गई थीं जिसमें सात बसें मानक के अनुरूप नहीं चल सकीं, 503 बसें मानक के अनुरूप चलीं। इन शटल बसों ने कुल 12 किमी की दूरी तय की। 
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Kumbh 2019
प्रयागराज में चल रहे कुंभ में बीते शनिवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के नेतृत्व में 10,000 सफाईकर्मियों ने एकसाथ सफाई करके विश्व रिकॉर्ड बनाया है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के ऋषिराज ने बताया कि उनके मानकों के अनुसार 7021 सफाईकर्मी अगर एक जगह सफाई कर दें तो वह रिकॉर्ड होगा। एक साथ कई जगह सफाई का यह पहला मामला है। उन्होंने कहा कि इससे पहले यह रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम था। ढाका में एक स्थान पर 7000 लोगों ने सफाई की थी, लेकिन कुंभ में पांच जगहों पर 10 हजार सफाई कर्मचारियों ने एकसाथ पांच स्थानों पर सफाई करके एक कीर्तमान स्थापित किया है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्वयं इस भव्य एवं दिव्य कुंभ मेले में आकर स्नान किया है।  



 
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प्रयागराज में 2025 में होगा पूर्ण कुंभ

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modi in kumbh
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुंभ के आयोजन पर लगभग 4300 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। सरकार ने 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें कुंभ में आने का निमंत्रण भी दिया था। हाल ही में यूनेस्को ने कुंभ को विश्व की सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल किया गया है।  भारत में 4 जगहों पर कुंभ होता है। इनके नाम- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। इनमें से हर स्थान पर 12वें साल कुंभ होता है। प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। प्रयागराज में पिछला कुंभ 2013 में हुआ था, 2019 में यह अर्द्धकुंभ है। हालांकि यूपी सरकार इसे कुंभ बता रही है। प्रयागराज में पूर्ण कुंभ 2025 में होगा।
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कुंभ का मतलब कलश होता है। इसका संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से है। मान्यता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां ये बूंदें गिरीं, वहीं पर कुंभ होता है। इन नदियों के नाम- गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा हैं। 
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प्रयाग कुंभ का लिखित इतिहास में जिक्र गुप्तकाल में (चौथी से छठी सदी) मिलता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किताब में कुंभ का जिक्र किया। वह 617 से 647 ईसवीं तक भारत में रहे थे। लिखा है कि प्रयाग में राजा हर्षवर्धन ने अपना सबकुछ दान कर राजधानी लौट जाते हैं। 
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