प्रतीकात्मक तस्वीर
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'जमीनी स्तर पर संवाद की जरूरत'
इस तरह के डर की वजह से नाइजीरिया के संविधान में पहले से मौजूद भेदभाव के खिलाफ कानूनों को लागू करना मुश्किल बना हुआ है। साथ ही 1956 में इग्बो सांसदों ने खास तौर पर ओहु या ओसु के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने के लिए एक कानून बनाया था। भेदभाव खत्म करने की वकालत करने वाले इमो राज्य के एक कैथोलिक आर्कबिशप एंथनी ओबिन्ना कहते हैं, "कुछ विशेष रीति-रिवाजों को खत्म करने के लिए कानूनी तरीके पर्याप्त नहीं हैं। आपको जमीन पर जाकर लोगों से संवाद करना होगा।"
मडुवागु लोगों को समझाती हैं कि बदलाव कितना जरूरी है। वो लोगों से कहती हैं कि "आज हम उनके घरों में किराएदार के तौर पर रहते हैं, उनके यहां काम करते हैं, उनसे पैसे उधार लेते हैं।" ओसु के साथ पुराने समय में ऐसे संबंधों के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था। ऐसा कोई आधिकारिक डेटा नहीं है जो बताता हो कि दक्षिण-पूर्वी नाइजीरिया में गुलामों के कितने वंशज रहते हैं। लोग अपने बारे में जानकारी छिपाते हैं। हालांकि, छोटे समुदायों में ऐसा करना मुमकिन नहीं है, जहां हर शख्स एक दूसरे के बारे में जानता है।
कुछ समुदायों में सिर्फ ओहु या ओसु हैं, जबकि कुछ में दोनों हैं। हाल के सालों में ओहु और ओसु के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कई समुदायों में संघर्ष और विवाद हुए हैं। गुलामों के कुछ वंशजों ने अपने खुद के नेतृत्व और कुलीन समूहों के साथ समानांतर समाज शुरू किया है। लगभग 13 साल पहले, इमो राज्य में एक समूह बनाया गया जिसका नाम था नैनीजी, यानी "उसी गर्भ से।" नैनीजी की कई कोशिशों में एक कोशिश ये भी शामिल है कि वो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपने हजारों सदस्यों के बच्चों की अरेंज मैरिज कराने में मदद करता है, ताकि "फ्री बॉर्न" के साथ रिश्ता जोड़ने के बाद उनके दिल को टूटने से बचाया जा सके।