दुनिया के इन देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा!
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वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि पर्वतीय इलाके एक अन्य खतरे के प्रति तेजी से संवेदनशील होता जा रहे हैं, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। यह तब होता है, जब ग्लेशियर से पिघला पानी एक बड़ी झील का निर्माण कर देता है और यह झील एक पतले तथा अस्थिर प्राकृतिक बांध के पीछे रुकी रहती है। अगर ग्लेशियर का कोई हिस्सा ढह जाए या पिघले हुए पानी का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो यह प्राकृतिक बांध टूट सकता है। इसके बाद पानी का एक बेहद शक्तिशाली प्रवाह पहाड़ से नीचे की तरफ तबाही मचा सकता है।
हालांकि, वैज्ञानिक फिलहाल यह नहीं मान रहे हैं कि नेपाल और तिब्बत में आई भयानक बाढ़ GLOF की वजह से आई थी, क्योंकि उपग्रह तस्वीरों में भूस्खलन से पहले इस क्षेत्र में किसी बड़ी झील के बनने के प्रमाण नहीं मिले हैं। फिर भी दुनिया भर में ग्लेशियर अब ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस तरह की बाढ़ के खतरे में डाल रहे हैं, जो नेपाल में देखी गई घटना जितनी ही या उससे भी अधिक घातक साबित हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अपने शोधपत्र में नवीनतम मॉडलिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया है और यह पता लगाया कि GLOF का खतरा किन इलाकों में सबसे ज्यादा है। उन्होंने शोध में पता लगाया कि इस खतरे में रहने वाले 1.5 करोड़ से ज्याजा लोगों में आधे से ज्यादा लोग सिर्फ चार देशों, भारत, पाकिस्तान, पेरू और चीन में रहते हैं।
हाई माउंटेन एशिया (HMA), जिसमें हिमालय, काराकोरम, हिंदूकुश और आसपास की पर्वत श्रृंखलाएं शामिल हैं और यह सबसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों में है। इन इलाकों में लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं और ग्लेशियल झीलों के सबसे पास रहते हैं। इन इलाको में 10 किलोमीटर से कम दूरी पर 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। दुनिया में GLOF के खतरे में आने वाली जनता में से करीब 62 फीसदी लोग हाई माउंटेन एशिया में रहते हैं। इनमें करीब 30 लाख भारत में और 20 लाख पाकिस्तान में हैं।
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