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अजब-गजब: दिन में एक बार गायब हो जाता है वायुमंडल, वजह जान वैज्ञानिक भी हुए हैरान

Fri, 03 Dec 2021 03:05 PM IST
आशिकी पटेल फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिन में एक बार गायब हो जाता है वायुमंडल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
सालों से दुनियाभर के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों पर नजर जमाए हुए हैं। कभी-कभी अंतरिक्ष में ऐसे नजारे दिख जाते हैं, जिन्हें देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हो जाते हैं। हाल ही में वायुमंडल में एक अजीबोगरीब घटना देखी गई है। उत्तरी ध्रुव से करीब 250 मील की ऊंचाई पर एक फनल के आकार का गैप मिला है जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में खुलता है। नासा के मुताबिक ये गैप दिन में सिर्फ एक बार ही दिखाई देता है। 

सबसे बड़ी बात ये है कि ये गैप सिर्फ स्थानीय समयानुसार दोपहर में ही दिखाई देता है यानी जब सूरज अपने उच्चतम बिंदु पर होता है तब ये दीखता है। इस बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ज्यादा चिंता की बात नहीं है, क्योंकि उत्तरी ध्रुव के चुंबकीय क्षेत्र ने सूर्य के कणों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोका है। लेकिन नया गैप सैटेलाइट और स्पेसक्राफ्ट के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। 
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दिन में एक बार गायब हो जाता है वायुमंडल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
इस नए गैप को देखने वाले नासा के वैज्ञानिकों ने का कहना है कि इस क्षेत्र में रेडियो और जीपीएस सिग्नल में बाधा पैदा हो रही है। इसके अलावा इस गैप के खुलने पर इस क्षेत्र के गुजरने वाला कोई भी विमान धीमा हो जाता है। नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके पीछे के कारणों की खोज की जा रही है। फिलहाल अभी तक वैज्ञानिकों को इसमें कामयाबी नहीं मिली है।
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ozone layer - फोटो : istock
इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का फेयरबैंक्स के प्रमुख जांचकर्ता और भौतिकविद मार्क कोंडर का कहना है कि पृथ्वी से करीब 250 मील की ऊंचाई पर उड़ते वक्त स्पेसक्राफ्ट जब इस क्षेत्र से गुजरते हैं तो वो अधिक खिंचाव महसूस करते हैं। वहीं इस मामले में नासा का कहना है कि आयनमंडल में विद्युत और चुंबकीय प्रभाव इस गैप का एक प्रमुख कारण हो सकता है।
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दिन में एक बार गायब हो जाता है वायुमंडल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
अभी हाल ही में खबर आई थी कि ओजोन परत में छेद साल 2021 में अंटार्कटिका से बड़ा हो गया है। हैरानी की बात ये है कि इसमें हर साल वृद्धि हो रही है। हर साल अगस्त से अक्टूबर के बीच ओजोन की मात्रा कम होती है और अंटार्कटिक के ऊपर यह छेद दिखता है। वहीं इसका सबसे बड़ा आकार सितंबर के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक रहता है। 
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