फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज का रहस्य: काफी रहस्यमयी है मैहर माता का मंदिर, जहां सैकड़ों सालों से आल्हा ऊदल कर रहे हैं मां शारदा की आरती

Tue, 12 Oct 2021 12:40 PM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
मैहर देवी मंदिर - फोटो : facebook/Maa_Samalesari_Temple
आज के रहस्य की इस श्रृंखला में हम बात करने वाले हैं मैहर माता मंदिर के रहस्य के बारे में, जिसके विषय में कहा जाता है कि वहां पर आज भी आल्हा ऊदल अदृश्य रूप में मां शारदा की आरती करने के लिए आते हैं। हिंदू पौराणिक ग्रंथों की मानें तो दक्ष प्रजापति ने एक बहुत बड़े महायज्ञ का आयोजन किया था। इस महायज्ञ में उनकी पुत्री सती भी शामिल होना चाहती थी। इससे पहले माता सती ने अपने पिता प्रजापति दक्ष की आज्ञा के बिना भगवान शिव से शादी की थी। इस कारण प्रजापति दक्ष उनसे काफी नाराज थे। माता सती और भगवान शिव को इस यज्ञ में आने का निमंत्रण नहीं दिया गया था। इसके बावजूद माता सती ने भगवान शिव से यज्ञ में जाने का जिद्द किया। मां सती जब वहां पर पहुंची तो उन्हें देखकर प्रजापति दक्ष काफी क्रोधिथ हुए। उन्होंने माता सती का खूब अपमान किया। इस अपमान से मां इतनी ज्यादा आहत हुईं कि उन्होंने जलते हुए अग्नि कुण्ड में अपने आप को भस्म कर लिया। 
विज्ञापन

2 of 5
मैहर देवी मंदिर - फोटो : facebook/Vindhya_Pradesh
भगवान शिव को जैसे ही इसके बारे में पता चला वह माता के शरीर को लेकर विलाप करते हुए घूमने लगे। इसे देख भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काट दिया। उसके बाद मां के शरीर के 51 हिस्से भारत के विभिन्न भागों में आकर नीचे गिरे। जहां-जहां ये हिस्से गिरे बाद में वहां-वहां शक्ति पीठ का निर्माण हुआ। उन्हीं 51 शक्तिपीठों में एक शक्तिपीठ मां शारदा का है। कहा जाता है कि यहां पर मां सती का हार गिरा था। मां शारदा का ये पावन धाम मध्य प्रदेश के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। 
विज्ञापन

3 of 5
मैहर देवी मंदिर - फोटो : facebook/Yuvraj_Singh_Rathour_Banna
इस मंदिर के ऐसे कई चमत्कार हैं, जिसके चलते देश दुनिया से कई लोग माता के दर्शन करने यहां आते हैं। मान्यता है कि मंदिर का जब पट बंद हो जाता है और सभी पुजारी और भक्त पहाड़ के नीचे चले आते हैं एवं वहां पर कोई नहीं रहता। उस वक्त मंदिर के भीतर आल्हा और ऊदल अदृश्य रूप में माता की पूजा करने के लिए आते हैं। 

4 of 5
मैहर देवी मंदिर - फोटो : facebook/Narendra_Mandwariya
सुबह जब मंदिर का पट खुलता है, उस वक्त मां की पूजा हो चुकी होती है। आल्हा और उदल मां शारदा के परम भक्त थे। उन्होंने मां के इस पवित्र स्थल की खोजी की थी। दोनों भाइयों ने 12 साल तक कठोर तपस्या की। इससे मां काफी खुश हुईं और उनको अमरत्व का वरदान दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मैहर देवी मंदिर - फोटो : facebook/Jaisingh_Yadav
मान्यता कहती है कि दोनों भाइयों ने माता के समक्ष अपनी जीभ को अर्पण कर दिया था, पर माता ने उसे लेने से मना कर दिया। हमारी संस्कृति में मां शारदा को बुद्धि की देवी कहा गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें