Trending News: साधु-संतों के त्याग की कई कहानियां सुनने और पढ़ने को मिलती हैं। जापान के भिक्षुओं के त्याग की कोई हद नहीं थी। वह जीवित रहते ही अपने आप को ममीज में बदल लेते थे। इसका उद्देश्य यह था मौत के बाद उनके को कोई नुकसान न हो यानी सड़े न। अभी भी लोग इन भिक्षुओं के शव को देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं। जापान में प्राचीन भिक्षुओं को sokushinbutsu के नाम से जाना जाता है। यह भिक्षु बिना भोजन और पानी के रहते थे। जब वह ऐसा नहीं कर पाते थे, तो जहर पीते थे। वे शुगेंडो नाम के बौद्ध धर्म की एक प्राचीन प्रथा का पालन करते थे।
एक मीडिया रिपोर्ट में एटलस ऑब्स्कुरा के हवाले से बताया गया है कि तीन साल तक भिक्षु एक खास तरह का भोजन लेते थे। इसमें वह नट्स और बीज खाते थे। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि में शामिल होते थे, ताकि शरीर की चर्बी कम हो। इसके बाद अगले तीन साल वह छाल और जड़ें खाते थे।