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63 की उम्र में भी सेवा का ऐसा जुनून, हर दिन 250 गरीबों को फ्री में खिलाते हैं खाना

Tue, 03 Mar 2020 02:22 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भोजन बांटते बालचंद्रा - फोटो : सोशल मीडिया
इस दुनिया में ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें अपने दो वक्त की रोटी के लिए न जाने कितना मेहनत करना पड़ता है। वहीं कई लोग भूखे पेट भी सोने को मजबूर हैं। ऐसे में अगर कोई इन गरीबों के पेट भरने की व्यवस्था करे तो उससे महान कोई नहीं हो सकता है। हालांकि कई लोग इस तरह के काम कर गरीबों का पेट भर रहे हैं। कुछ ऐसा ही काम तमिलनाडु के 63 वर्षीय बालाचंद्रा भी कर रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
तमिलनाडु के तूतूकुडी जिले के रहने वाले बालाचंद्रा हर दिन 250 आदिवासियों के लिए खाने का पैकेट बांट रहे हैं। बालाचंद्रा रोजाना तूतूकुडी की पहाड़ी बस्तियों पानप्पल्ली, कोंडानुर, जम्बुकंडी, कुट्टुपुली और थेक्कालूर में जाते हैं और लोगों को स्वादिष्ट खाना खिलाते हैं। बालाचंद्रा हर दिन 11 से 12 बजे के बीच खाना लेकर पहुंच जाते हैं।

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भोजन बांटते बालचंद्रा - फोटो : सोशल मीडिया
खाना बांटने के साथ-साथ बालाचंद्रा हर परिवारों को महीने के तीसरे रविवार को 5-5 किलो चावल, 1-1 किलो दाल देते हैं। बालाचंद्रा इस नेक काम को 14वीं शताब्दी के कावेरीपत्तनम के संत पत्तिनाथर से प्रभावित होकर कर रहे हैं। बालाचंद्रा ने जब अपने कारोबार की शुरुआत कर दी थी तभी से उनका विचार था कि वो गरीबों को मुफ्त में भोजन कराएंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
बालाचंद्रा कहते हैं, ‘मैंने जिंदगी के 60 साल परिवार और काम को दिए। खूब पैसा कमाया। हालांकि, मैं शुरू से ही जरूरतमंदों की मदद करना चाहता था। अब मैंने कारोबार छोड़ दिया है। परिवार की जिम्मेदारियों से भी मुक्त हूं। अब मैं खुद से किए गए वादों को पूरा कर रहा हूं।’
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भोजन बांटते बालचंद्रा - फोटो : सोशल मीडिया
बालाचंद्रा के परिवार के सभी लोग अच्छे से सेटल हैं। उनके परिवार में पत्नी, बेटा और दो बेटियां हैं। बालाचंद्रा का बेटा कोयम्बटूर के मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में एमडी है और बेटियां अपने-अपने घर विदेशों में सेटल हो गई हैं।
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