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महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने अपने ही बड़े भाई को मारने के लिए क्यों उठा लिए थे हथियार?

Wed, 20 Feb 2019 01:33 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला
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mahabharat
महाभारत के युद्ध से जुड़े ऐसे कई रहस्य हैं, जिससे आज भी लोग अनजान हैं। एक ऐसा ही रहस्य है जब महाभारत युद्ध के 17वें दिन अर्जुन में अपने ही बड़े भाई युधिष्ठिर को मारने के लिए तलवार उठा ली थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अर्जुन ने ऐसा क्यों किया था? 
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महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 'महाभारत' की एक कहानी के अनुसार, कुरुक्षेत्र के मैदान में युधिष्ठिर और कर्ण के बीच युद्ध हो रहा था। सभी को इस युद्ध से बेहद उम्मीदें थीं कि तभी शस्त्र विद्या में माहिर कर्ण ने युधिष्ठिर पर एक जोरदार वार किया, जिससे युधिष्ठिर बुरी तरह घायल हो गए। कर्ण चाहता तो उस समय युधिष्ठिर को मार सकता था, लेकिन माता कुंती को दिए वचन के मुताबिक उसने युधिष्ठिर को जीवित छोड़ दिया। 
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Mahabharat Bheem
जब नकुल और सहदेव ने अपने बड़े भाई युधिष्ठिर की बुरी हालत देखी तो वो उन्हें जल्द ही तंबू में ले गए, जहां उनकी मरहम-पट्टी की गई। उधर, अर्जुन और भीम अभी भी युद्ध में कौरवों की सेना से संघर्ष कर रहे थे। 

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अर्जुन को युधिष्ठिर की हालत के बारे में पता नहीं था। युद्ध भूमि में जब उन्होंने युधिष्ठिर को नहीं देखा तो उन्होंने भीम से इसके बारे में पूछा। तब जाकर भीम ने उन्हें सारी बातें बताई। इसके बाद अर्जुन अपने बड़े भाई का हाल-चाल जानने के लिए उस तंबू की ओर चल दिए, जहां युधिष्ठिर घायल आवस्था में पीड़ा से जूझ रहे थे। 
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Mahabharat - फोटो : Social media
युधिष्ठिर ने जब अर्जुन को उनके तंबू की ओर आते हुए देखा तो वो खुश हो गए। उन्हें लगा कि अर्जुन युद्ध में कर्ण को हराकर उनके पास खुशखबरी देने आ रहे हैं, लेकिन अर्जुन ने उन्हें बताया कि उन्हें तो इस बात का पता भी नहीं था कि वो कर्ण के साथ युद्ध में घायल हुए हैं। उन्होंने युधिष्ठिर से कहा कि उन्हें भीम ने उनकी हालत के बारे में बताया, तब जाकर वो यहां अपने बड़े भाई को देखने आए हैं। 
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Arjuna Mahabharat - फोटो : Social media
अर्जुन की बात सुनकर युधिष्ठिर अपना आपा खो बैठे। वह अर्जुन पर गुस्सा हो गए और बोले, 'तुम यहां केवल मेरे घावों के बारे में पूछने आए हो या फिर उन्हें और कुरेदने आए हो? तुम किस तरह के भाई हो जो अब तक अपने बड़े भाई के अपमान का बदला नहीं ले सके। अगर तुम मेरे लिए इतना भी करने में असमर्थ हो तो तुम्हारे इस गांडीव अस्त्र का कोई लाभ नहीं है। उतार कर फेंक दो इसे'। 
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अर्जुन ने जैसे ही अपने बड़े भाई के मुंह से गांडीव उतारकर फेंकने की बात सुनी, वह क्रोधित हो गए। दरअसल अर्जुन ने एक वचन लिया था कि कोई भी अपना या पराया व्यक्ति अगर उनके पवित्र और प्रिय गांडीव अस्त्र के बारे में अपशब्द बोलेगा, वह उसका सिर कलम कर देंगे। यही कारण था कि युधिष्ठिर द्वारा गांडीव की निंदा करते ही अर्जुन ने युधिष्ठिर को मारने के लिए तलवार उठा लिया। 
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हालांकि बाद में भगवान श्रीकृष्ण वहां पहुंच गए और उन्होंने अर्जुन को युधिष्ठिर को मारने से रोक दिया। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया और बोले, 'हे अर्जुन! मैं तुम्हारे प्रिय गांडीव को लेकर लिए गए वचन का सम्मान करता हूं। वचनानुसार तुम्हें अपने बड़े भाई को भी मार देने का पूरा हक है, धर्म के आधार पर यह पाप है'। श्रीकृष्ण के समझाने के बाद अर्जुन शांत हुए और उन्होंने अपनी तलवार फिर से म्यान में रख ली। 
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