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आखिर जापान में बच्चों से अधिक पालतू जानवरों का क्यों हो रहा है रजिस्ट्रेशन?

Mon, 04 Jan 2021 09:51 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जापान में बच्चों का जन्मदर लगातार कम होते जा रहा है। इसी बीच वहां एक अलग ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जापान के लोगों में कुत्ते-बिल्लियां पालने का शौक इतना बढ़ गया है कि वहां बच्चों से अधिक रजिस्ट्रेशन पालतू जानवरों का हो गया है। बता दें जापान में अगर आप पालतू जानवरों को अपने साथ रखते हैं या फिर उसे विदेश यात्रा पर ले जाते हैं, तो उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, इस अनोखे चलन के बारे में अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाला Goldman Sachs ने पता लगाया। जापान की अर्थव्यवस्था में गिरावट के लिए कम जन्मदर को जिम्मेदार मानते हुए कंपनी ने जब कई देशों के आर्थिक ट्रेंड पता किया, तो पाया कि बच्चों की जगह पालतू पशु ले चुके हैं। कंपनी की इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि जापान में पशु कैरे बच्चों को रिप्लेस कर चुके हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
साल 2014 में जापान में 15 साल के आयु के लगभग 16.5 मिलियन बच्चे थे, जबकि पालतू पशु जैसे कुत्ते-बिल्लियों की संख्या 21.3 मिलियन थी। ये पालतू जानवर बच्चों की जगह ले रहे हैं और यहां के जोड़ों में संतान पैदा करने का चाव भी बहुत कम हो गया है। हालांकि, इसके पीछे कई सारी वजहें हैं, जिनमें से एक वजह जापानियों का काम के लिए ऑब्सेशन माना जाता है। इस देश में लोग छुट्टियां लेने से इतना बचते हैं कि खुद कंपनियों ने ऐसा नियम बना दिया कि हर कर्मचारी को सालाना कम से कम 14 दिनों की छुट्टी लेनी ही होगी, ताकि उनका मानसिक स्वास्थ्य सही रहे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
खास बात तो ये है कि काम के प्रति दीवानगी पुरुषों-महिलाओं में एकदम बराबर है। ऐसे में कोई भी संतान की जिम्मेदारी लेने से बचना चाहता है। बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर जोड़ों ने संतान जन्म पर ध्यान नहीं दिया, तो अगले 20 सालों में यहां की 35 फीसदी आबादी 80 साल से अधिक आयु वालों की होगी। वहीं अगले 5 ही सालों में यानी 2025 तक जापान का हर 3 में से 1 इंसान 65 साल की उम्र से अधिक का होगा।

विशेषज्ञों ने इसको लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि अगर जापान में जनसंख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगले 50 सालों में ये आबादी घटकर महज 80 मिलियन रह जाएगी और 100 सालों में ये 40 मिलियन हो जाएगी। यानी जापान में बुजुर्ग आबादी के बढ़ने के साथ-साथ देश की जनसंख्या घट रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इन सब के बीच जापान पालतू जानवरों के मामले में सुपरपावर भी बन गया है। इस देश में युवाओं से अधिक है। औसत आय के मामले में दूसरे देशों से काफी आगे जापान में लोग अपने पालतू पशु की देखभाल भी शानदार तरीके से करते हैं। इसमें साफ-सफाई, खाना और समय पर टीकाकरण ही नहीं है, बल्कि लोग ज्यादातर वीकेंड पर जानवरों के लिए शॉपिंग करते हैं और नए ट्रेंड के कपड़े लेते हैं। जापान में कुत्तों के लिए कई बड़े इंटरनेशनल ब्रांड डिजाइनर कपड़े बनाने लगे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
जापान में टोक्यो की हालत तो कुछ ऐसी हो गई है कि यहां बच्चों के कपड़ों और जरूरत की चीजें खोजने में भले ही मुश्किल हो, लेकिन कुत्तों के लिए कपड़े और सामान आसानी से मिल जाते हैं। जानवरों की जरूरतें के लिए सज चुकी इंडस्ट्री से यहां सालाना 8.2 पाउंड बिलियन से अधिक की कमाई हो जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जापान में कुत्तों के लिए योग क्लास की भी व्यवस्था है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अगर कोई जानवर दूसरे देशों से खरीदकर लाया जाए, तो उसे जापान के घर में सीधी एंट्री नहीं मिलती है। सबसे पहले उसे क्वारंटाइन किया जाता है। इसे Animal Quarantine Service (AQS) कहते हैं, जिसके लिए सभी शहरों में अलग-अलग सेंटर हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान, न्यूजीलैंड और फिजी से लाए गए जानवरों को क्वारंटाइन नहीं किया जाता है। पालतू जानवरों के रहने-खाने पर ही नहीं, बल्कि जापान में लोग उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार पर भी लाखों खर्च कर रहे हैं।
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