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भारत का वो किला, जिस पर तोप के गोले भी हो जाते थे बेअसर, अंग्रेजों ने भी मान ली थी हार

Mon, 16 Dec 2019 07:14 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लौहगढ़ का किला, भरतपुर - फोटो : Social media
भारत में ऐसे कई किले हैं, जो किसी न किसी वजह से मशहूर हैं। एक ऐसा ही किला राजस्थान के भरतपुर में भी है, जिसे 'लौहगढ़ (लोहागढ़) का किला' कहा जाता है। इस किले को भारत का एकमात्र अजेय दुर्ग कहा जाता है, क्योंकि इसे कभी कोई जीत नहीं पाया। यहां तक कि अंग्रेजों ने भी हार मान ली थी।  
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लौहगढ़ का किला, भरतपुर - फोटो : Social media
इस किले का निर्माण 285 साल पहले यानी 19 फरवरी, 1733 को जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। चूंकि उस समय तोप और बारूद का प्रचलन अधिक था, इसलिए इस किले को बनाने में एक विशेष तरह का प्रयोग किया गया था, जिससे कि बारूद के गोले भी किले की दीवार से टकराकर बेअसर हो जाएं। 
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लौहगढ़ का किला, भरतपुर - फोटो : Social media
इस किले के निर्माण के समय पहले एक चौड़ी और मजबूत पत्थर की ऊंची दीवार बनाई गयी। इन पर तोपों के गोलों का असर नहीं हो, इसके लिए इन दीवारों के चारों ओर सैकड़ों फुट चौड़ी कच्ची मिट्टी की दीवार बनाई गयी और नीचे गहरी और चौड़ी खाई बना कर उसमें पानी भरा गया। ऐसे में अगर दुश्मन पानी को पार कर भी गया तो सपाट दीवार पर चढ़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। 

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लौहगढ़ का किला, भरतपुर - फोटो : Social media
इस किले पर आक्रमण करना किसी के लिए भी आसान नहीं था, क्योंकि तोप से निकले हुए गोले गारे की दीवार में धंस जाते थे और उनकी आग शांत हो जाती थी। इससे किले को कोई नुकसान पहुंचता ही नहीं था। यही वजह है कि दुश्मन इस किले के अंदर कभी प्रवेश नहीं कर पाये। 
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लौहगढ़ का किला, भरतपुर - फोटो : Social media
कहते हैं कि इस किले पर कब्जा जमाने के लिए अंग्रेजों ने 13 बार आक्रमण किया था। अंग्रेजी सेना ने यहां सैकड़ों तोप के गोले बरसाए थे, लेकिन उन गोलों का किले पर कोई असर नहीं हुआ। वह 13 में से एक बार भी किले को भेद नहीं सके। कहा जाता है कि अंग्रेजों की सेना बार-बार हारने से हताश हो गई तो वहां से चली गई। 
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लौहगढ़ का किला, भरतपुर - फोटो : Social media
अंग्रेज इतिहासकार जेम्स टाड के मुताबिक, इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारें ही थीं, जो मिट्टी से बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद इस किले को फतह करना लोहे के चने चबाने से कम नहीं था। इस किले ने हमेशा दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं और अपना लोहा मनवाया है। 
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