तुंगुस्का विस्फोट
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झील में छुपे हो सकते हैं तुंगुस्का के राज
नासा के शोधकर्ता बिल कूक कहते हैं कि हमारा वायुमंडल, ब्रह्मांड से आने वाली ऐसी चीजों से हमारी हिफाजत करता है। इसीलिए जब कोई धूमकेतु या उल्कापिंड या क्षुद्र ग्रह हमारी धरती के वायुमंडल में घुसता है, तो वो असंख्य टुकड़ों में बंट जाता है। इस तरह कोई बड़ी तबाही होने से बच जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि तुंगुस्का महाविस्फोट में भी यही हुआ होगा। जो भी उल्कापिंड या धूमकेतु रहा होगा, वो जमीन से 8-10 किलोमीटर ऊपर ही टुकड़े-टुकड़े हो गया होगा। जो छोटे-छोटे टुकड़े बचे होंगे, वो बड़े इलाके में बिखर गए होंगे। इसीलिए वहां पर कोई गहरा गड्ढा नहीं बना।
आर्तेमिएवा कहती हैं कि उस दिन ऐसा ही हुआ होगा। टक्कर की वजह से आग और धुएं का बड़ा सा गुबार उठा होगा, जिसका दायरा कई किलोमीटर रहा होगा। लेकिन, अभी भी तुंगुस्का की कहानी पर पूर्ण विराम नहीं लगा है। कई रिसर्चर मानते हैं कि कुछ तो है, जो अभी भी राज है। 2007 में इटली के वैज्ञानिकों की टीम ने दावा किया कि तुंगुस्का से 8 किलोमीटर दूर स्थित चेको नाम की झील में उस घटना के राज छुपे हो सकते हैं। हो सकता है कि 1908 में धरती से टकराने वाला उल्कापिंड इसी झील की गहराई में दफ्न हो गया हो। इसे रूसी रिसर्चर आसानी से निकाल सकते हैं।
हालांकि झील इतनी गहरी नहीं है कि ऐसा राज उसमें लंबे वक्त तक छुपा हो। मगर रूस ने कभी भी इस दावे की पड़ताल करने की कोशिश नहीं की। लेकिन, इटली की बोलोना यूनिवर्सिटी के लुका गैस्पेरिनी कहते हैं कि चेका झील इसी धमाके की वजह से बनी। उसके बनने का और कोई तरीका नहीं हो सकता। गैस्पेरिनी ये मानते हैं कि झील की गहराई में उस महाविस्फोट के राज छुपे हुए हैं।