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Aditya-L1 Mission: आदित्य मिशन में क्यों जुड़ा है एल 1? जानिए कैसे और क्या करेगा खोज

Tue, 29 Aug 2023 02:21 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
Aditya-L1 Mission: चंद्रयान-3 मिशन की कामयाबी के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब सूर्य मिशन की तैयारी कर रहा है। 2 सितंबर को इसरो अपना सूर्य मिशन (Aditya-L1) लॉन्च करेगा। सूर्य की स्टडी के लिए यह पहला भारतीय मिशन है। आदित्य एल -1 मिशन से सूर्य के तापमान, पराबैगनी किरणों के धरती, खासकर ओजोन परत पर पड़ने वाले प्रभावों और अंतरिक्ष में मौसम की गतिशीलता का अध्ययन किया जा सकेगा। 

अंतरिक्ष में आदित्य एल-1 जिस स्थान पर जाएगा वो धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर है। धरती से सूर्य की दूरी करीब 150 मिलियन किलोमीटर है। आदित्य-एल1 मिशन का उद्देश्य L1 के चारों तरफ की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करना है। सूरज और धरती के बीच में यह प्वाइंट स्थित होता है। सूरज से धरती की दूरी की तुलना में सिर्फ एक प्रतिशत है। आदित्य एल-1 को इस बिंदु तक पहुंचने में 120 दिन यानी चार महीने लगेंगे। 
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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
 क्यों सूरज पर शोध

सूरज एक तारा है जिससे हमारे सौर मंडल को ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि सूरज की उम्र करीब 450 करोड़ साल है। धरती से सूरज 15 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित है। धरती पर बिना सौर ऊर्जा के जीवन संभव नहीं है। सूरज की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण इस सौर मंडल में सभी ग्रह टिके हुए हैं। अगर सूरज की गुरुत्वाकर्षण शक्ति नहीं होती, तो अंतरिक्ष में सभी कहीं दूर तैर रहे होते। 
 
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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
सूरज के केंद्र यानी कोर का तापमान अधिकतम 1.50 करोड़ डिग्री सेल्सियस रहता है। इस स्थान पर न्यूक्लियर फ्यूजन होता है, जिसकी वजह से सूरज के चारों से आग निकलती है। सूरज के सतह से थोड़ी ऊंचाई यानी इसके फोटोस्फेयर का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस तक होता है। सौर मंडल के बाकी ग्रहों को समझने के लिए सूरज की स्टडी जरूरी है। 

 

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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
आदित्य-एल1 क्यों है नाम? 

इसरो ने अपने सूर्य मिशन का नाम आदित्य-एल1 रखा है। इसके नाम से ही मिशन के उद्देश्य के बारे में पता चलता है। L1 का मतलब 'लाग्रेंज बिंदु 1' है। इतालवी-फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ लुई लैग्रेंज के नाम पर अंतरिक्ष में कुछ बिंदुओं यानी जगहों के नाम 'लैग्रेंज' बिंदु के तौर पर रखे गए हैं। सूरज की अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति है, तो वहीं धरती की अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। अंतरिक्ष में जिस स्थान पर इन दोनों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति आपस में टकराती है। 
 
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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
आसान भाषा में जहां पर धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का असर समाप्त है और वहां से सूरज की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की शुरुआत होती है। इस बीच के बिंदु को लैग्रेंज प्वाइंट कहा जाता है। धरती और सूरज के बीच ऐसे पांच लैग्रेंज बिंदु चिन्हित किए गए हैं। भारत का सूर्ययान लैग्रेंज बिंदु वन यानी L1 पर तैनात होगा। लैग्रेंज बिंदु अंतरिक्ष यान के लिए एक पार्किंग स्थल की तरह हैं। इस स्थान पर सालों तक किसी अंतिक्ष यान को रखा जा सकता है। 


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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
धरती सूर्य और चंद्र को मिलाकर इस प्रणाली में पांच लैग्रेंज(L1, L2, L3, L4, L5) बिंदु हैं। L3 सूर्य की दूसरी तरफ है, जिसकी वजह से वैज्ञानिकों के लिए किसी काम का नहीं है। L1 और L2 धरती के पास स्थित है। सूर्य का अध्ययन करने के लिए सबसे उपयुक्त L1 बिंदु है। इसकी वजह से ही  इसरो ने अपने अंतरिक्ष यान को L1 बिंदु पर भेज रहा है। सूरज को आदित्य भी कहा जाता है, जिसकी वजह से इस मिशन का नाम 'आदित्य-एल1' है। 

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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
आदित्य एल 1 मिशन का बजट करीब 400 करोड़ रुपए है। इसको पीएसएलवी-सी 57 से लांच किया जाएगा। इसरो ने आदित्य एल-1 मिशन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और 2 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा। भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 की लाॅन्चिंग को आम लोगों को देखने के लिए इसरो ने एक लिंक जारी किया है। इस लिंक https://lvg.shar.gov.in/VSCREGISTRATION/index.jsp के जरिए लोग देख सकते हैं। इस पर पंजीकरण करना होगा। 
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