विकास उपाध्याय
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इन सभी के बीच उन्होंने 10वीं क्लास की एग्जाम दी। परिक्षा का परिणाम बहुत अच्छा तो नहीं रहा लेकिन 41 फीसदी अंकों से साथ वो पास हो गए। विकास की रूचि पढ़ाई में बिल्कुल नहीं थी, लेकिन उनके पिताजी की इच्छा थी कि उनका बेटा पढ़-लिख कर अच्छी नौकरी करे। ऐसे में विकास की मां ने जो भी थोड़े बहुत गहने थे बेचकर उन्हें उरई एक रिश्तेदार के पास आगे की पढ़ाई के लिए भेज दिया। विकास को अपने घर की स्थिति के बारे में पता था, इसलिए उन्होंने सोच लिया कि चाहे जो कुछ भी हो जाए, वो अपनी समस्या को घर पर बिना बताए खुद ही सॉल्व करेंगे।