कोरोना वायरस महामारी से जुड़ी चिंताओं का ध्यान ना रखते हुए, एक बड़ी भीड़ पूरे माली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को बनाए रख रही है, जो इस पश्चिम अफ्रीकी देश के राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीटा के इस्तीफे की मांग कर रही है। भ्रष्टाचार, रूढ़िवाद, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं, राष्ट्रीय नेतृत्व का अभाव, चुनावी कदाचार, सांप्रदायिक और जिहादी हिंसा को समाप्त करने में सरकार की अक्षमता ने लोगों में इस हताशा को हवा दी है कि वो सड़कों पर उतर आए हैं।
विपक्षी राजनीतिक दल भी प्रदर्शनों को आयोजित करने में एक साथ हो गए हैं, लेकिन उनकी आवाज अब निर्णायक नहीं रह गई है। वो कोई और हैं जिन्होंने कीटा और उनकी सरकार के मंत्रियों को बातचीत के लिए मजबूर कर दिया है और वो हैं इमाम महमूद डिको, जो इन विशाल प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं। इमाम महमूद डिको इस वक्त राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीटा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। वो भी ऐसे समय में जब राष्ट्रपति इब्राहिम के बारे में समझा जा रहा है कि 15,000 अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की मौजूदगी और लगातार मिली बाहरी वित्तीय सहायता के बावजूद वो माली के सामने खड़ी समस्याओं को लेकर बेपरवाह हैं और दीवानों की तरह अपने अंदाजे लगा रहे हैं।