नवाब सिराजुद्दौला
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सुबह तीन बजे छिपकर भागे थे सिराजुद्दौला
जहां क्लाइव लूट में अपना हिस्सा मिलने का इंतजार कर रहे थे, वहीं मीर जाफर के बेटे मीरान ने पूरे बंगाल में राजधानी से भाग चुके सिराजुद्दौला को ढूंढने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मशहूर इतिहासकार सैयद गुलाम हुसैन खां अपनी फारसी में लिखी किताब 'सियारुल मुताखिरीं' में लिखा है, 'सिराजुद्दौला आम आदमियों के कपड़े पहनकर भागे थे। उनके साथ उनके नजदीकी रिश्तेदार और कुछ जन्खे (किन्नर) भी थे। सुबह तीन बजे उन्होंने अपनी पत्नी लुत्फ उन निसा और कुछ नजदीकी लोगों को ढंकी हुई गाड़ियों में बैठाया, जितना सोना-जवाहरात वो अपने साथ ले जा सकते थे, अपने साथ लिया और राजमहल छोड़ कर भाग गए।'
वो पहले भगवानगोला गए और फिर दो दिन बाद कई नावें बदलते हुए राजमहल के किनारे पहुंचे। यहां पर वो कुछ खाने के लिए रुके। उन्होंने खिचड़ी बनवाई क्योंकि उन्होंने और उनके साथ चल रहे लोगों ने तीन दिनों से कुछ नहीं खाया था।