लॉर्ड कर्जन
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ब्रिटिश गर्वनर लॉर्ड कर्जन के साथ हुई बातचीत में मुस्लिम नेता बंगाल विभाजन पर राजी हुए, जिसके तहत पूर्व में असम और सिलहट वाले इलाके मुस्लिम बहुल आबादी के लिए और पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा के हिस्से हिंदू बहुल आबादी के लिए तय किए गए। विभाजन से पहले बंगाल क्षेत्रफल में फ्रांस जितना बड़ा था और इसकी आबादी फ्रांस से कई गुना ज्यादा थी। इतने बड़े सूबे का प्रशासनिक बागडोर संभालने में ब्रिटिश सरकार को काफी मुश्किलें हो रही थी।