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भारत-पाक में मानव अंग के इस हिस्से को बेचने की होड़, पाक ने 5 साल में चीन से कमाए 11 करोड़ रुपए

Tue, 22 Jan 2019 02:32 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला
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आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे द्वारा सैलून में काटकर फेंके गए बालों का कारोबार इतना है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान ने इससे हाल ही में करोड़ों रुपए कमा लिए हैं। पूरी दुनिया में मानव वालों सालाना कारोबार कई अरब रुपए का है। वैश्विक बाजार में भारत और पाकिस्तान इस मार्केट के प्रमुख निर्यातक हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच मानव बाल निर्यात के कारोबार पर कब्जा करने की होड़ मची हुई है। दुनिया के कई विकसित देश इसके खरीदार हैं।
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जी हां, आपको सुनने में ये भले ही अटपटा लग रहा हो, लेकिन मानव बाल भारत-पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनते जा रहे हैं। अमूमन हमरे घरों में टूटे बाल या सैलून में काटे गए बाल कूड़े में फेंक दिए जाते हैं। वहीं कुछ लोगों के लिए ये करोड़ों का कारोबार और कमाई का प्रमुख जरिया है।
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पाकिस्तान ने पिछले पांच वर्षों में चीन को एक लाख पांच हजार 461 किलोग्राम मानव बालों का निर्यात किया है। पाकिस्तानी संसद के निचले सदन में पहली बार मानव बालों के निर्यात की वाणिज्यिक कीमत के बारे में रिपोर्ट पेश की गई है। पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से पेश इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल में उन्होंने मानव बाल के निर्यात से 1.6 मिलियन यूएस डॉलर (भारतीय मुद्रा में 11,43,60,000 रुपये) का व्यापार किया है। 

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पाकिस्तान से चीन के अलावा उच्च गुणवत्ता वाले मानव बालों का अमेरिका (US), यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) और जापान समेत दुनिया के कई देशों में भी निर्यात किया जाता है, क्योंकि वहां भी मनोरंजन जगत में इसकी काफी मांग है। चीनी मेकअप इंडस्ट्री में मानव बालों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका आयात किया जा रहा है। 
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पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, एक प्रमुख ब्यूटिशियन ए एम चौहान बताते हैं कि निर्यातकों ने हेयर सलोन में अपने डस्टबिन लगा रखे हैं। ग्राहकों के काटे गए बालों को बिन में इकट्ठा किया जाता है। निर्यातक 5,000 या 6,000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बाल खरीदते हैं। इस तरह पाकिस्तान में हेयर कटिंग सैलून चलाने वाले बाल बेचकर अतिरिक्त कमाई करते हैं। इस वक्त पाकिस्तान में  हेयर एक्सटेंशन और विग की काफी मांग है।
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वहीं चीन में कास्मेटिक उद्योग के बढ़ने के साथ ही मानव बालों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2017 के दौरान दुनिया भर में मानव बाल के निर्यात का कुल कारोबार तकरीबन 81.2 मिलियन यूएस डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 580 करोड़ रुपये) रहा था।
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भारत में तीन हजार करोड़ का है मानव बाल का कारोबार

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व्यापारियों के अनुसार पूरे देश में पैर पसार चुका बालों का कारोबार तकरीबन तीन हजार करोड़ रुपये तक का हो चुका है। बस शर्त यह है कि बाल कटे हुए नहीं, बल्कि कंघी से झड़े हुए हों और इनकी लंबाई 8 इंच से कम न हो। मानव बालों की मांग सबसे ज्यादा कोलकाता और चेन्नई में है। वहां इनका ट्रीटमेंट कर इन्हें चीन भेजा जाता है। मध्यप्रदेश में करीब 100 करोड़ रुपये के बाल हर साल बिक रहे हैं। बालों का ये कारोबार अब भारत के लगभग हर राज्य में फैल चुका है। बालों के कारोबार में सैलून, विशेषकर महिला पार्लरों की प्रमुख भूमिका है। दिल्ली-एनसीआर के कई महिला पार्लर भी अपने यहां काटे जाने वाले बालों को 500-1000 रुपये किलो में बेचते हैं।

होली के पहले बढ़ जाती है बालों की कीमत

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कोलकाता में एक किलो बाल की कीमत 800 से 1200 रुपये तक है। होली से पहले इन बालों की कीमत 2000 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच जाती है, क्योंकि होली में रंगीन विग की डिमांड बढ़ जाती है। भारत में सैलून में कटे हुए बालों के साथ-साथ कंघी से झड़े हुए बालों की बिक्री का फीसद भी पिछले पांच सालों में काफी बढ़ा है। सबसे ज्यादा कीमत कंघी में टूटे हुए बालों की होती है, जिसकी लंबाई आठ इंच से ज्यादा हो।

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बालों के एक कारोबारी का कहना है कि कंघी से झड़े बालों को ट्रांसप्लांट करना और इससे विग बनाना आसान होता है। इसीलिए इन बालों का कारोबार शुरू हुआ। इन झड़े बालों को साफ करके एक तरह के कैमिकल में रखा जाता है। फिर इसे सीधा कर अलग-अलग डिजाइन के बिग बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

तिरुपति मंदिर से है 220 करोड़ का कारोबार 

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वर्ष 2014 में तिरुपति मंदिर से ही 220 करोड़ रुपये के बालों की बिक्री हुई। सल दर साल ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में मुंडन कराने की परंपरा है। यहां काफी संख्या में महिलाएं भी मुंडन कराती हैं। लिहाजा, महिला बालों के लिए तिरुपति प्रमुख स्थान है।
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2018 में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया था कि वह तिरुपति मंदिर से रोजाना पांच ट्रक बाल खरीदते हैं। इन बालों से उनकी फैक्ट्री में एमिनो एसिड आधारित माइक्रो न्यूट्रिएंट बनाया जाता है, जिसका खेती में प्रयोग होता है। इसकी एक बोतल की कीमत लगभग 900 रुपये होती है, जिसे वह किसानों को 300 रुपये में देते हैं। दुबई ने भी उन्हें 180 कंटेनर एमिनो एसिड का ऑर्डर दिया है, जिसकी आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। इस कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने बताया था कि कटे हुए बालों से तैयार एमिनो एसिड से उन्हें सालाना 12 से 15 करोड़ रुपये का मुनाफा होता है, जबकि वह इसे लगभग लागत के खर्च पर ही बेच देते हैं।
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