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भारत में इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण, लोग मानते हैं विद्वान और करते हैं पूजा

Mon, 19 Oct 2026 01:51 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

देशभर में विजयदशमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह पर लोग रावण का पूतला जलाते हैं। दशहर का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लेकिन भारत में कुछ जगहें हैं, जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। 
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भारत की इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण, लोग मानते हैं विद्वान और करते हैं पूजा - फोटो : AI
भारत में विजयदशमी (दशहरा 2026) का त्योहार लोग धूमधाम से मनाते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। विजयदशमी के दिन पूरे देश में रावण का पुतला दहन किया जाता है। भगवान राम ने रावण का इसी दिन वध किया था और माता सीता को मुक्त कराया था। लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहे हैं जहां पर लोग रावण दहन नहीं करते हैं, बल्कि उसकी पूजा करते हैं। आज हम आपको अपनी खबर में कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताएंगे। 

यूपी का बिसरख गांव

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान राम का जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। कुछ लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के बिसरख गांव में रावण का जन्म हुआ था। यह गांव देश की राजधान दिल्ली से करीब 40 किमी की दूरी पर है। स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण उनका पूर्वज था। दशहरा के दिन देश के ज्यादातर इलाकों में रावण जलाया है और उत्सव मनाया जाता है, लेकिन बिसरख गांव के लोग इस दिन त्योहार नहीं मनाते हैं और रावण दहन भी नहीं करते हैं। रावण के मंदिर को लेकर बिसरख गांव की हमेशा चर्चा होती है। रावण के मंदिर के लिए यह गांव प्रसिद्ध है। 

गांव में रावण का मंदिर बनाया गया है और यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना रावण के दादा पुलस्त्य ने की थी। रावण के पिता और रावण भी मौजूद शिवलिंग के सामने तपस्या कर चुके हैं। माना जाता है कि रावण के पिता विश्रवा ऋषि का गांव बिसरख था। वह यहां पर हर दिन भगवान शिव की पूजा करते थे। पूरे देश में बिसरख पहली ऐसी जगह है जहां अष्टभुजीय शिवलिंग स्थापित है। इसी जगह पर रावण ने अपनी शिक्षा प्राप्त की थी। बताया जाता है कि रावण के बाद कुंभकरण, सूर्पणखा और विभीषण का भी इसी गांव में जन्म हुआ था।

बताया जाता है कि र्षों पहले इस गांव के लोगों ने रावण के पुतले का दहन किया था, तो कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद गांव के लोगों ने मंत्रोच्चारण के साथ रावण की पूजा की जिसके बाद यहा पर शांति हुई। इस बात में कितनी सच्चाई है यह हम नहीं बता सकते हैं। लेकिन इस गांव में दशहरा नहीं मनाया जाता है। गांव के लोग दशहरा न मनाने की अजीबोगरीब कहानियां बताते हैं।
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भारत की इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
मंदसौर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश का मंदसौर भी रावण से जुड़ी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। खासकर खानपुरा इलाके में नामदेव समुदाय के कुछ लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, रावण की पत्नी मंदोदरी का संबंध मंदसौर से था, जिसकी वजह से यहां रावण के प्रति सम्मान का भाव देखने को मिलता है। दशहरे पर रावण का पुतला जलाने की जगह कुछ लोग उसकी पूजा-अर्चना करते हैं। उनके लिए रावण दहन उत्सव नहीं, बल्कि एक सम्मानित परंपरा से जुड़ा विषय है।
 
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भारत की इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण - फोटो : Adobe Stock
गढ़चिरौली, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में गोंड समुदाय के कुछ वर्गों के लोग रावण को अलग नजरिए से देखते हैं। यहां पर प्रचलित कुछ मान्यताओं के मुताबिक, रावण को सम्मान के साथ याद किया जाता है और उन्हें अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। दशहरे के मौके पर लोग रावण दहन की परंपरा की जगह पूजा और प्रार्थना को महत्व देते हैं। 

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भारत की इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण - फोटो : Adobe Stock
विदिशा में दशानन को मिलता है विद्वान का सम्मान

मध्य प्रदेश के विदिशा के पास स्थित रावणग्राम भी रावण से जुड़ी अपनी अनोखी परंपरा के लिए चर्चा में रहता है। यहां पर रावण को समर्पित एक मंदिर है, जहां दशानन को एक विद्वान और पूजनीय व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, दशहरे के अवसर पर रावण की पूजा की जाती है। यहां रावण दहन की जगह लोग उसके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। 

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भारत की इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण - फोटो : Adobe Stock
कर्नाटक का कोलार और मालवल्ली

कर्नाटक के कोलार और मालवल्ली जैसे इलाकों में भी कुछ स्थानीय परंपराओं में रावण को सम्मान मिलता है। इन मान्यताओं में रावण को सिर्फ रामायण के प्रतिपक्षी के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व और भगवान शिव के परम भक्त के तौर पर याद किया जाता है। हालांकि, यह परंपरा पूरे क्षेत्र में समान रूप से प्रचलित नहीं है।

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भारत की इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण - फोटो : Adobe Stock
साल में सिर्फ एक दिन खुलता है दशानन मंदिर

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित शिवाला क्षेत्र का दशानन मंदिर अपनी अनोखी परंपरा की वजह से लोगों का ध्यान खींचता है। बताया जाता है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार दशहरे के दिन खोला जाता है। इस अवसर पर मंदिर की साफ-सफाई की जाती है और रावण की पूजा-अर्चना होती है। पूजा के बाद मंदिर को फिर बंद कर दिया जाता है। 
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