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Dussehra 2022: भारत के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा, जानिए क्या है इसके पीछे की कहानी

Wed, 05 Oct 2022 10:46 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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मेरठ के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा - फोटो : iStock
Dussehra 2022: बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार दशहरा ( Dussehra 2022) देशभर में धूमधाम मनाया जाता है। भगवान श्रीराम ने इसी दिन अहंकारी रावण का वध किया था। इस दिन जगह-जगह रावण का पुतला दहन किया जाता है। हालांकि भारत में कुछ ऐसी जगहे हैं जहां पर रावण दहन नहीं किया जाता है बल्कि उसकी पूजा होती। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित एक गांव में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है। 

मेरठ के इस गांव का नाम गगोल है। इस गांव में दशहरा नहीं मनाने की एक खास वजह है। दरअसल इस गांव में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। इसके बाद से आज तक उनकी याद में दशहरा का त्योहार नहीं मनाया जाता है। अंग्रेजी हुकुमत ने दशहरे के दिन पीपल के पेड़ पर क्रांतिकारियों को लटका दिया था। यह पीपल का पेड़ आज भी गांव के बाहर स्थित है। इस पीपल के पेड़ पास ही एक मठ है जिसका नाम भूमिया है। 
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मेरठ के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा - फोटो : istock
मेरठ में कई प्राचीन मंदिर भी है जिसमें प्राचीन बिल्वेश्वर नाथ मंदिर की एक अलग पहचान है। मान्यता है कि त्रेता युग में रावण की पत्नी मंदोदरी इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने आती थी। भगवान शंकर ने मंदोदरी की तपस्या से प्रसन्न होकर बिल्वेश्वर नाथ मंदिर में ही दर्शन दिए थे और वरदान मांगने के लिए कहा था। मंदोदरी दानवों के राजा मयदानव की पुत्री थी।
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मेरठ के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा - फोटो : iStock
इसके बाद मंदोदरी ने भगवान शिव से वर मागा कि उसका पति धरती पर सबसे बलशाली और विद्वान हो। मान्यता है कि इस मंदिर में रावण और मदोदरी मिले थे और दोनों की शादी हुई। रावण पुलस्त्य मुनि का पौत्र था और विश्रवा ऋषि का पुत्र था।

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मेरठ के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा - फोटो : iStock
जानिए क्या है इतिहास

गगोल गांव मेरठ जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां पर विजयादशमी के दिन रावण नहीं जलाने की वजह दूसरी जगहों से काफी अलग है। इस गांव में दशहरे के दिन मायूसी छाई रहती है। बताया जाता है कि लोग इस दिन लोगों के घर में चूल्हा भी नहीं जलता है। 
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मेरठ के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा - फोटो : iStock
दरअसल जिन क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया गया था उनमें इस गांव के लोग भी शामिल थे। शहीदों की याद में गांव वालों ने जिस पीपल पर लोगों को फांसी दी गई थी वहां उनकी याद में मंदिर बनवाया है। दशहरा के दिन इस मंदिर में गांव वाले शहीदों की पूजा करते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं। 
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