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Dussehra 2022: यूपी के इस गांव में हुआ था रावण का जन्म, दशहरा के दिन नहीं जलाते हैं पुतला, लोग करते हैं पूजा

Wed, 05 Oct 2022 10:38 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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यूपी के इस गांव में हुआ था रावण का जन्म - फोटो : iStock
Dussehra 2022: विजयदशमी (दशहरा 2022) का त्योहार देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस मौके पर देशभर में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। भगवान राम ने रावण का इसी दिन वध किया था और माता सीता को मुक्त कराया था। लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहे हैं जहां पर लोग रावण दहन नहीं करते हैं बल्कि उसकी पूजा करते हैं। उत्तर प्रदेश के एक गांव में रावण का मंदिर है और यहां दशानन के पुतले का दहन नहीं किया जाता है। 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान राम का जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। कुछ लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के बिसरख गांव में रावण का जन्म हुआ था। यह गांव देश की राजधान दिल्ली से 40 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां के लोग मानते हैं कि रावण उनका पूर्वज था। 
 
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यूपी के इस गांव में हुआ था रावण का जन्म - फोटो : iStock
दशहरा के दिन देश के अधिकतर इलाकों में रावण का दहन किया जाता है और उत्सव मनाया जाता है, लेकिन बिसरख गांव के लोग इस दिन त्योहार नहीं मनाते हैं। इसके साथ ही रावण दहन भी नहीं करते हैं। रावण के मंदिर को लेकर बिसरख गांव की हमेशा चर्चा होती रहती है। रावण के मंदिर के लिए यह गांव प्रसिद्ध है। 
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यूपी के इस गांव में हुआ था रावण का जन्म - फोटो : iStock
गांव के बीचोबीच रावण का मंदिर बनाया गया है और यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना रावण के दादा पुलस्त्य द्वारा की गई थी। रावण के पिता और रावण भी मौजूद शिवलिंग के सामने तपस्या कर चुके हैं।

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dussehra 2022 - फोटो : iStock
माना जाता है कि रावण के पिता विश्रवा ऋषि का गांव बिसरख था। वह यहां पर हर दिन भगवान शिव की पूजा करते थे। पूरे देश में बिसरख पहली ऐसी जगह है जहां अष्टभुजीय शिवलिंग स्थापित है। इसी जगह पर रावण ने अपनी शिक्षा प्राप्त की थी। बताया जाता है कि रावण के बाद कुंभकरण, सूर्पणखा और विभीषण का भी इसी गांव में जन्म हुआ था। 
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dussehra 2022 - फोटो : iStock
कहा जाता है कि सालों पहले इस गांव के लोगों ने रावण के पुतले का दहन किया था, तो कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद गांव के लोगों ने मंत्रोच्चारण के साथ रावण की पूजा की जिसके बाद यहा पर शांति हुई। इस बात में कितनी सच्चाई है यह हम नहीं बता सकते हैं। लेकिन इस गांव में दशहरा नहीं मनाया जाता है। गांव के लोग दशहरा न मनाने की अजीबोगरीब कहानियां बताते हैं। 
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