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Doomsday Clock: प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम, जानिए क्या है डूम्सडे क्लॉक

Thu, 26 Jan 2023 11:53 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम - फोटो : Twitter @JoeConsorti
Doomsday Clock: प्रलय के बेहद करीब दुनिया पहुंच चुकी है। वैज्ञानिकों की तरफ से इसको लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। परमाणु वैज्ञानिकों ने दुनिया में तबाही का संकेत देने वाली घड़ी 'डूम्सडे क्लॉक' (Doomsday Clock) में 10 सेकेंड कम कर दिया है। यह तीन साल में पहली बार किया गया है। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स (बीएएस) द्वारा इस कयामत की घड़ी में समय सेट किया जाता है। 

कयामत का समय यानी आधी रात ( रात 12 बजे से ) सिर्फ 90 सेकेंड दूर है। इस घड़ी में आधी रात 12 बजने का मतलब है कि दुनिया समाप्त हो जाएगी। इस घड़ी में आधी रात होने में जितना कम समय रहेगा दुनिया में परमाणु युद्ध होने का खतरा उतना ही करीब होगा। रूस और यूक्रेन के बीच इस समय युद्ध चल रहा जो चरम पर पहुंच चुका है। अब वैज्ञानिकों ने परमाणु हमले की आशंका जताई है और महाविनाश के लिए सिर्फ 90 सेकेंड का समय सेट किया है। 
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प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम - फोटो : Twitter @JoeConsorti
अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में वैज्ञानिकों ने बताया कि तबाही के कगार पर दुनिया खड़ी है। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स (बीएएस) ने इस दौरान बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध, कोरोना महामारी, जलवायु संकट और जैविक खतरा सबसे बड़ा संकट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि डूम्सडे क्लॉक कभी भी तबाही के इतनी ज्यादा करीब नहीं पहुंची है। 
 
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प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम - फोटो : Twitter @JoeConsorti
बीते तीन साल से डूम्सडे क्लॉक की सुई आधी रात से 100 सेकेंड की दूरी पर रुकी थी। उस समय बताया गया था कि अभी खतरा 100 सेकेंड की दूरी पर है। लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चरम पर पहुंचने की वजह से तबाही और करीब पहुंच गई है। 

 

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प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम - फोटो : iStock
बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स' (बीएएस) के वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 1949 में जब रूस ने परमाणु बम आरडीएस-1 का परीक्षण किया था। इसके बाद दुनिया में तेजी से परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि उस समय यह घड़ी आधी रात से 180 सेकेंड की दूरी पर थी। उन्होंने बताया कि चार साल बाद 1953 में इसका समय घटकर 120 सेकेंड पर पहुंच गया। उस समय अमेरिका ने साल 1952 में पहले थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस का परीक्षण किया था और शीत युद्ध चरम पर था।

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वैज्ञानिक इस कयामत की घड़ी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि मानवता के लिए समस्या पैदा करने वाली घटनाओं की वजह से दुनिया के तबाह होने में कितने सेकंड का समय और बचा है। डूम्सडे क्लॉक के मुताबिक, आधी रात होने में जितना कम समय बचेगा,  उतना ही परमाणु और जलवायु संकट के खतरे के करीब दुनिया पहुंचेगी। 

 
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प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम - फोटो : Twitter @JoeConsorti
जानिए डूम्सडे क्लॉक के बारे में...

डूम्सडे क्लॉक के खतरे के स्तर को कई पैमानों पर मापा जाता है। खतर के स्तर को युद्ध, हथियारों, जलवायु परिवर्तन, विध्वंसकारी तकनीक, प्रोपेगेंडा वाले वीडियो और अंतरिक्ष में हथियारों की तैनात कोशिश जैसी हलचल से मापा जाता है। साल 1991 में यह घड़ी आधी रात से सबसे ज्यादा 17 मिनट दूर थी। डूम्सडे क्लॉक एक संकेत देने वाली घड़ी है। यह मानवीय गतिविधियों की वजह से आने वाली वैश्विक तबाही की आशंका के बारे में बताता है। इस कयामत की घड़ी में आधाी रात 12 बजने को तबाही का संकेत माना जाता है। 

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प्रलय के करीब पहुंची दुनिया! कयामत की घड़ी में 10 सेकेंड हुआ कम - फोटो : Twitter @JoeConsorti
अमेरिका ने अगस्त साल 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु हमला किया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने मानव निर्मित खतरे से दुनिया को आगाह करने के लिए इस घड़ी को बनाया। यह घड़ी साल 1947 से लगातार काम कर रही है। यह इस बात का संकेत देती है कि दुनिया पर परमाणु हमले की आशंका कितनी अधिक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 75 साल के इतिहास में घड़ी की सुई का कांटा सबसे ज्यादा तनावपूर्ण मुकाम पर है।
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