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Fact Check: क्या चिकन खाने की वजह से फैल रहा है ब्लैक फंगस? जानिए सच्चाई

Tue, 01 Jun 2021 05:30 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
देश अभी कोरोना वायरस से उभरा ही नहीं कि दूसरी बीमारी ब्लैक फंगस ने डेरा जमा लिया है। ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। ब्लैक फंगस ज्यादातर नाक के जरिये होता है। यह नाक के जरिये आंख और दिमाग में भी पहुंच सकता है। अगर ये फंगस दिमाग में पहुंच जाता है, तो जान के लिए खतरा बन जाता है। ये अक्सर उन लोगों में होता है, जिनमें किसी भी वजह से इम्यूनिटी कम होती है या डायबिटीज के मरीज हैं। कोरोना वायरस के साथ ही ब्लैक फंगस के बढ़ते प्रकोप के कारण लोगों में डर का माहौल भी है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई तरह की जानकारियां साझा की जा रही हैं, जिसमें कई भ्रामक और गलत जानकारी भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पर ये भी दावा किया जा रहा है कि ब्लैक फंगस फार्म चिकन खाने की वजह से फैल रहा है। आइए जानते हैं इस दावे की सच्चाई...
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ब्लैक फंगस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि पंजाब सरकार ने पॉलट्री फॉर्म को इंफेक्टेड एरिया घोषित किया है। फार्म चिकन खाने के कारण ही ब्लैक फंगस फैल रहा है। ऐसे में फार्म चिकन ना खाएं और स्वस्थ रहें। वायरल हो रहे इस पोस्ट को लेकर पीआइबी फैक्ट चेक की टीम ने पड़ताल की और इसकी सच्चाई के बारे में पता लगाया।
 
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ब्लैक फंगस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल में पाया कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा ये दावा पूरी तरह से फर्जी है। ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि ब्लैक फंगस चिकन से इंसानों में फैल सकता है। साथ ही पड़ताल कर रही टीम को ऐसी कोई प्रामाणिक रिपोर्ट नहीं मिली, जो इस वायरल दावे की पुष्टि करती हो कि ब्लैक फंगस के वजह से पंजाब में चिकन फार्म को भी संक्रमित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
हालांकि, पंजाब के लुधियाना में बर्ड फ्लू के वजह से एक चिकन फार्म को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है। लेकिन इसके पीछे की वजह ब्लैक फंगस नहीं, बल्कि बर्ड फ्लू है।
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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
फर्जी खबरों से निपटने के लिए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने खबरों का सत्यापन करने के लिए एक 'तथ्य जांच इकाई' गठित की है, जिसे पीआईबी फैक्ट चेक टीम कहा जाता है। कोरोना वायरस से जुड़ी किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले आप उसकी अच्छे से पड़ताल करें।
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