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चीनी वैज्ञानिकों ने इसलिए बनाए बंदर के क्लोन, यह है पूरा मामला

Sat, 26 Jan 2019 02:45 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Social Media
चीनी वैज्ञानिकों ने जीन-एडिटेड मैकाक से सर्कैडियन रिदम विकारों के साथ कृत्रिम तरीके से बंदरों का क्लोन बनाया है, जो नींद की समस्याओं, अवसाद और अल्जाइमर रोग से जुड़े शोध में मदद करेंगे। यह पहली बार है कि जीन-संपादित बंदर से बायोमेडिकल रिसर्च के लिए कई क्लोन बनाए गए हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने बीते गुरुवार को बंदर की क्लोनिंग की घोषणा चीनी पत्रिका 'नेशनल साइंस रिव्यू' में प्रकाशित दो लेखों के साथ की। 
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सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने कहा कि पहली बार जैवचिकित्सकीय अनुसंधान के लिए बंदर के जीन बदलकर कई क्लोन बनाए गए हैं। क्लोनिंग के माध्यम से जन्मे बच्चों को शंघाई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस ऑफ चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेस में जन्म दिया गया।
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चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इससे जीन में बदलाव को लेकर नए सिरे से नैतिक चिंताएं पैदा हो सकती हैं। कुछ दिन पूर्व ही जीन में परिवर्तन कर दुनिया के पहले मानव शिशु को जन्म देने का दावा चीन के वैज्ञानिकों ने किया था और इस 'अनधिकृत प्रयोग' को लेकर वैज्ञानिक जगत में उथल-पुथल मच गयी थी।

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चीनी वैज्ञानिकों ने क्लोन बनाने के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया जो करीब 2 दशक पहले डॉली नाम की भेड़ को तैयार करने में किया गया था। झोंग झोंग और हुआ हुआ नाम के 2 अफ्रीकन लंगूर कृत्रिम तरीके से तैयार किए गए हैं। इन्हें तैयार करने के लिए स्तनपायी जीव बंदरों, एपिस और मानवीय चीजों का सम्मिश्रण किया गया। इनका जन्म 6 से 8 हफ्ते पहले हुआ, इनका क्लोन गैर भ्रूण कोशिका से तैयार किया गया।
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इस पूरी प्रक्रिया को सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) के जरिए किया गया जिससे सेल को गर्भ में भेजा गया था। दोनों नवजात बंदरों को बोतल के जरिए दूध पिलाया जा रहा है और उनका विकास सामान्य तरीके से हो रहा है। रिसर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में ऐसे ही और अफ्रीकी लंगूरों के क्लोन तैयार किए जा सकते हैं।
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- फोटो : People's Daily
1996 में स्कॉटलैंड में सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर के जरिए ही डॉली नाम की कृत्रिम भेड़ तैयार की गई थी। इसे वैज्ञानिक जगत में बड़ी कामयाबी माना गया। आगे चलकर इसी सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर के जरिए 20 अन्य जन्तुओं के क्लोन तैयार किए गए जिसमें गाय, सूअर, कुत्ते, चुहे और बिल्ली जैसे जानवर शामिल हैं।
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- फोटो : China Daily
हालांकि लंदन में फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट में क्लोन तैयार करने में महारत हासिल करने वाले रॉबिन लॉवेल-बेज जो चीनी टीम के साथ इस काम में शामिल नहीं थे का कहना है कि यह बहुत प्रभावहीन है और प्रक्रिया बेहद खतरनाक थी।

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शंघाई स्थित इंस्टीट्यूट का कहना है कि उन्होंने अमेरिकी स्वास्थ्य संगठन की ओर से जानवरों को लेकर तैयार किए गए अंतरराष्ट्रीय मानपदंडों का पूरी तरह से पालन किया है, लेकिन इससे अब बहस फिर शुरू हो गई है कि क्लोन तैयार किया जाना सही है या नहीं।

पहले चूहों पर होता था शोध 

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वर्तमान समय में बड़े स्तर पर चूहों और मक्खियों का इस्तेमाल ऐसी बीमारियों पर शोध करने के लिए किया जाता है। ऐसे में यह जानवर इंसानी शरीर से अलग हैं तो कई बार कुछ शोध कामयाब नहीं हो पाते थे। बंदर लगभग मानव की तरह ही होते हैं, इसलिए वे शोध में वैज्ञानिकों की काफी मदद कर सकते हैं। अब क्लोन के माध्यम से बंदर तैयार होने के बाद शोध के लिए उनका व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। 
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चीन में नौ साल के कुत्ते का क्लोन भी बन चुका 

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चीन में नौ साल के सेलेब्रिटी कुत्ते 'जूस' की तरह ही दिखने वाला 'मिनी मी' को वैज्ञानिकों ने क्लोन तकनीक से तैयार किया। चीन की कॉमेडी फिल्मों में 'जूस' की खास भूमिका वाली फिल्में लोगों को खूब हंसाती हैं, लेकिन अब वह बूढ़ा हो चला है। जूस की जगह पर मिनी मी को चीनी फिल्मी पर्दे पर उतारा जा सके, इसके लिए बीजिंग की बायोटेक फर्म सिनोजेन ने जूस का क्लोन बनाया है। 26 नवंबर 2018 को मिनी मी का जन्म हुआ। 
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