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Water on Moon: चांद पर पानी को लेकर नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, हैरत में पड़े वैज्ञानिक

Sat, 23 Sep 2023 01:26 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Water on Moon - फोटो : iStock
Water on Moon: भारत ने चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारकर इतिहास रच दिया। चंद्रयान-3 ने चांद के कई रहस्यों से पर्दा उठाए हैं। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो एक बार फिर अब विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के कई ऐसे क्रेटर हैं, जहां पर सूरज का प्रकाश नहीं पहुंचता है। अभी तक के मिले डाटा से पता चलता है कि इन क्रेटर यानी गड्ढों में पानी हो सकता है। यह पानी बर्फ के रूर में मौजूद है। 

हालांकि एक नए शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस शोध के मुताबिक, संभावना है कि इनके अंदर पहले की तुलना में पानी कम हो। यह स्थायी रूप से छाए वाले इलाके कहे जाते हैं। भविष्य में इन गड्ढों के पास कई मिशन उतरेंगे, क्योंकि माना जाता है कि इनके अंदर बर्फ है। अंतरिक्ष यात्री इसका इस्तेमाल भविष्य के मिशन के दौरान करेंगे।
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Water on Moon - फोटो : iStock
इसका पानी साथ ही रॉकेट फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का सबसे अधिक ध्यान इसे रॉकेट फ्यूल बनाने पर है। उनका मकसद हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग करना है।
 
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Water on Moon - फोटो : iStock
अगर वैज्ञानिकों को इस काम में सफलता मिल जाती है, तो मंगल ग्रह के लिए जो मिशन जाएगा, वह यहां से होकर जाएगा। लेकिन नए अध्ययन के निष्कर्षों से जानकारी मिली है कि पीएसआर अधिक से अधिक 3.4 अरब साल पुराने हैं। जिन विशाल गड्ढों में यह हैं, वह 4 अरब साल पुराने हैं।
 

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What is the anomaly of the Moon South Pole? - फोटो : iStock
नए अध्ययन से संकेत मिला है कि जितना पानी माना जाता है, उसकी मात्रा के आंकड़े को कम करना चाहिए। एरिजोना में प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक और नए अध्ययन के प्रमुख लेखक, नॉर्बर्ट शॉर्गोफर ने कहा कि इंपैक्ट और गैस का बाहर आना संभावित स्रोत हैं। 

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Water on Moon - फोटो : iStock
उनका कहना है कि चंद्रमा के इतिहास के शुरुआती दिनों में यानी जब तक वर्तमान के पीएसआर का निर्माण नहीं हुआ था, तब तक चरम पर था। उनकी टीम ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए चंद्रमा की शुरुआत से उसके विकास का मॉडल तैयार किया है।


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Water on Moon - फोटो : iStock
पानी पर नया खुलासा

धरती से मंगल ग्रह के आकार का एक ग्रह टकराया था, जिसके बाद चांद का निर्माण हुआ। सिमुलेशन से पता है कि करीब 4.1 अरब साल पहले चांद अपनी धुरी पर झुकाव महसूस किया, जिसकी वजह से यह 77 डिग्री तक पहुंच गया था। 

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Water on Moon - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने लिखा कि हो सकता है कि उससे पहले चांद पर पानी रहा हो, लेकिन इतने बड़े झुकाव के कारण सभी बर्फ खत्म हो गई होगी। सिमुलेशन में चंद्रमा के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के पास पीएसआर नजर आए, जो कक्षा के फिर से अपनी जगह आने के बाद समय के साथ बढ़ते चले गए। लेकिन संभावना है कि इनके पानी की मात्रा कम है। 
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