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Comet: खतरे में दुनिया! धरती के पास आ रहा विशालकाय धूमकेतु, बचे हैं सिर्फ इतने दिन

Tue, 05 Jul 2022 03:10 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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धरती के पास आ रहा विशालकाय धूमकेतु - फोटो : iStock
Comet: अतंरिक्ष रहस्यों (Space Mystery) से भरा पड़ा है जहां हर दिन कोई न कोई नई घटना घटती रहती है। इनमें कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिनसे धरती को भी खतरा रहता है। अब एक बार फिर अंतरिक्ष में एक ऐसी घटना होने जा रही जिसकी वजह से धरती पर खतरा मंडरा रहा है। इस खतरे की वजह विशालकाय धूमकेतु है जो धरती के नजदीक आने वाला है। वैज्ञानिकों ने इस धूमकेतु को साल 2017 में सौर मंडल के बाहर खोजा था। 

इसके बाद से यह सिर्फ सौर मंडल में आता जा रहा है। 14 जुलाई को यह हमारी धरती के बहद नजदीक आएगा। यानी सिर्फ 10 दिन बचे हैं जब यह पृथ्वी नजदीक पहुंचेगा। इसका नाम कॉमेट सी/2017 के2 (पैनस्टार्स) (Comet C/2017 K2, PANSTARRS) है। आम भाषा में इसे K2 धूमकेतु कहा जाता है। आइए जानते हैं कि इस विशालकाय धूमकेतु से धरती को कई खतरा है या नहीं? 
 
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धरती के पास आ रहा विशालकाय धूमकेतु - फोटो : iStock
हबल स्पेस टेलिस्कोप ने साल 2017 में K2 धूमकेतु को खोजा था। इस दौरान यह सौर मंडल के बाहरी किनारे पर था। उस समय वैज्ञानिकों ने माना था कि खोजा गया धूमकेतु सबसे दूर है। बीते साल इसने मेगाकॉमेट बर्नाडिनेली-बर्नस्टीन की दूरी को पार कर लिया था। 14 जुलाई को यह पृथ्वी से 27 करोड़ किलोमीटर दूर से गुजरेगा। हालांकि इससे धरती को कोई खतरा नहीं है। वैज्ञानिकों के लिए इसके धरती के पास आना अद्भुत नजारा होगा।
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धरती के पास आ रहा विशालकाय धूमकेतु - फोटो : iStock
बीते साल से K2 धूमकेतु धरती की तरफ लगातार बढ़ रहा है। जमी गैस, पत्थर और धूल का एक गुब्बार होता है धूमकेतु। सूरज के पास पहुंचने पर यह पिघलने लगता है जिसकी वजह से इस पीछे सफेद रंग की पूंछ नजर आती है। धूमकेतु के चारों तरफ बनने वाले बादल को कोमा कहा जाता है। 

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धरती के पास आ रहा विशालकाय धूमकेतु - फोटो : iStock

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब से इसको खोजा गया है, तभी से यह सक्रिय है। तब यह शनि ग्रह और यूरेनस के आसपास की कक्षा में घूम रहा था। उस दौरान यह धरती से 240 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर था। शुरुआती जांच में जानकारी मिली है कि इस धूमकेतु का न्यूक्लियस यानी केंद्र बहुत विशाल है। 
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धरती के पास आ रहा विशालकाय धूमकेतु - फोटो : iStock
कनाडा-फ्रांस-हवाई टेलिस्कोप की मदद से इस पर स्टडी की गई थी। माना जाता है कि K2 धूमकेतु का न्यूक्लियस 30 से 160 किलोमीटर के बीच चौड़ा हो सकता है। हबल स्पेस टेलिस्कोप से पता चला था कि इसकी चौड़ाई 18 किलोमीटर है। धरती के पास आने पर अंतरिक्ष वैज्ञानिक इसके सही आकार का पता लगा पाएंगे। धरती पर मौजूद टेलिस्कोप की नजर 19 दिसंबर तक इस पर रहेगी। सूरज के पीछे छिपने तक इस पर नजर रखा जाएगा।
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