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Bahraich Wolf Attack: अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? विशेषज्ञ ने बताई 25 साल पुरानी खौफनाक कहानी

Thu, 05 Sep 2024 12:01 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? - फोटो : अमर उजाला
Bahraich Wolf Attack: उत्तर प्रदेश के बहराइच में आदमखोर भेड़ियों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह विलुप्तप्राय भेड़िये दिन के उजाले में भी बस्तियों में पहुंचने लगे हैं। इस खतरनाक जानवर की वजह से लोग खौफ में जीने को मजबूर हैं। लोग रात-रातभर जागकर अपने परिवार की सुरक्षा कर रहे हैं। अभी तक भेड़ियों ने बच्चों समेत 10 लोगों की जान ले ली है, तो वहीं करीब 45 लोगों को हमला कर घायल कर दिया है। इसके अलावा भेड़ियों ने सीतापुर, पीलीभीत और हस्तिनापुर में भी आतंक मचा रखा है। वन विभाग ने बड़ी मशक्कत के बाद बहराइच से चार भेड़ियों को पकड़ा है। 

इसके बाद भी इंसान और भेड़ियों के बीच संघर्ष जारी है। इससे साफ है कि अभी भी असली हमलावर पकड़ में नहीं आए हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इंसानों को शिकार बनाने वाले भेड़िये अभी तक पकड़े नहीं गए हैं। लिहाजा, स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को ज्यादा संजीदगी के साथ अभियान चलाने की आवश्यकता है। 
 
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अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? विशेषज्ञ ने बताई 25 साल पुरानी खौफनाक कहानी - फोटो : Freepik
वन विभाग ने लोगों को सुरक्षित रहने का निर्देश जारी किया है। वन विभाग ने बताया है कि इलाके में छह भेड़ियों का एक झुंड है, जो लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि, वन विभाग ने चार भेड़ियों को पकड़ लिया है और अभी दो की तलाश जारी है। जिले के 35 गावों में भेड़ियों का खौफ है। भेड़िया कुत्तों की प्रजाति का एक बेहद क्रूर और खूंखार जानवर होता है। यह एक मांसाहारी जानवर है।
 
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अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? विशेषज्ञ ने बताई 25 साल पुरानी खौफनाक कहानी - फोटो : Freepik
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी और बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में वन अधिकारी रहे ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि भेड़ियों में बदला लेने की प्रवृत्ति बहुत अधिक होती है। उन्होंने यह बात अपने अनुभव के आधार पर कही है। उनका कहना है कि इंसानों ने किसी न किसी तरह से भेड़ियों को नुकसान पहुंचाया होगा या उनके घरों को तबाह किया होगा। इसके अलावा उनको बच्चों को मारा होगा, जिसका वो बदला ले रहे हैं। 
 

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अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? विशेषज्ञ ने बताई 25 साल पुरानी खौफनाक कहानी - फोटो : Freepik
वर्तमान में ज्ञान प्रकाश सिंह वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सलाहकार हैं। उन्होंने 25 साल पहले जौनपुर और प्रतापगढ़ की एक घटना के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि उस दौरान सई नदी के किनारे वाले क्षेत्रों में भेड़ियों ने 50 से ज्यादा बच्चों को मारा था। उस समय जांच में खुलासा हुआ कि कुछ बच्चों ने भेड़ियों के दो बच्चों को मार दिया था। इसके बाद शावकों के माता-पिता भेड़ियों ने इंसानों के बच्चों को मारना शुरू कर दिया था। 

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अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? विशेषज्ञ ने बताई 25 साल पुरानी खौफनाक कहानी - फोटो : Freepik
वन विभाग ने उस समय आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर मुहिम चलाई थी। कुछ भेड़ियों को पकड़ लिया गया, लेकिन दोनों गुस्साए आदमखोर भेड़िये भाग गए। इसके बाद बड़े पैमाने पर खोजबीन की शुरुआत की गई। इसके बाद उनकी पहचान की गई और गोली मार दिया गया। अब इसी तरह का पैटर्न बहराइच में भी देखने को मिला है। दरअसल, जनवरी-फरवरी में ट्रैक्टर के पहियों के नीचे भेड़ियों के दो बच्चों की कुचलकर मौत हो गई। 

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अपने शावकों की मौत का बदला ले रहे भेड़िये? विशेषज्ञ ने बताई 25 साल पुरानी खौफनाक कहानी - फोटो : Freepik
बहराइच में पकड़े भेड़ियों में से कुछ को चकिया जंगल में छोड़ दिया गया है, जो जिले से कोई 40 किलोमीटर दूर है। गलती यह हुई है कि चकिया जंगल भेड़ियों का प्राकृतिक रहवास नहीं है। हो सकता है कि वो भेड़िए फिर लौट आए हों और बदला लेने के लिए हमला कर रहे हों। ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि आदमखोर भेड़ियों को पकड़ा गया हो। एक अगर बाहर रहता है, तो हमला करता रहेगा। हाल में हुए हमले इसी का नतीजा है। यह भी जरूरी नहीं है कि पकड़े गए भेड़िए आदमखोर हों। 
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