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अजब-गजब: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े जंगल से वैज्ञानिकों ने खोज निकाला 'चॉकलेट मेढक', तस्वीरें हो रही हैं वायरल

Tue, 01 Jun 2021 10:00 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मेढकों की ये प्रजाति अपनी खास त्वचा के लिए जानी जाती है और भूरे रंग के होने के वजह से वैज्ञानिकों ने इसे 'चॉकलेट फ्रॉग' नाम दिया है। वैज्ञानिकों ने इस मेढक का लैटिन नाम लिटोरिया मीरा रखा है, जिसका अर्थ होता है आश्चर्य या अजीब।
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चॉकलेट मेढक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े द्वीप न्यू गिनी के घने जंगलों में 'चॉकलेट मेढक' की खोज की है। पेड़ पर रहने वाले इस मेढक के रंग को देखकर सभी लोग हैरान हैं। मेढकों की ये प्रजाति अपनी खास त्वचा के लिए जानी जाती है और भूरे रंग के होने के वजह से वैज्ञानिकों ने इसे 'चॉकलेट फ्रॉग' नाम दिया है। बता दें कि इस मेढक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में कैडबरी फ्रेडो चॉकलेट बार काफी लोकप्रिय है और इस मेढक की खोज के साथ ही फ्रेडो चॉकलेट ट्रेंड हो रहा है। सेंटर फॉर प्लैनेटरी हेल्थ ऐंड फूड सिक्यॉरिटी और क्वींसलैंड म्यूजियम के पॉल ऑलिवर ने ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ जूलॉजी में लिखे पेपर में इस मेढक के बारे में चर्चा की है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मेढक इतने लंबे समय तक इंसानों की नजरों से दूर रहकर इसलिए रहस्य बना रहा, क्योंकि ये जिस उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में रहता है, उन जंगलों को भेदना कड़ी चुनौती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने काफी संघर्ष के बाद इस मेढक को खोजने में कामयाबी पाई है।

वैज्ञानिकों ने इस मेढक का लैटिन नाम लिटोरिया मीरा रखा है, जिसका अर्थ होता है आश्चर्य या अजीब। दरअसल, विशेषज्ञों ने इस मेढक को देखकर हैरत में पड़ गए थे, इसलिए इसका लैटिन नाम लिटोरिया मीरा रखा।

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चॉकलेट मेंढक - फोटो : सोशल मीडिया
पॉल ऑलिवर के मुताबिक, चॉकलेट मेढक यानी लिटोरिया मीरा का सबसे करीबी ऑस्ट्रेलियाई ग्रीन ट्री मेढक है और ये दोनों प्रजातियां काफी हद तक लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं। इन दोनों मेढक के बीच अंतर इतना ही है कि एक का रंग हरा, तो दूसरे का रंग चॉकलेट की तरह भूरा है।
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चॉकलेट मेंढक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
गौरतलब है कि ये चॉकलेट मेढक जहां पाया गया है वो एक गर्म वर्षावन है और इंसानों के लिए काफी खतरनाक है। इस क्षेत्र को मलेरिया के मच्छर, मगरमच्छों की मौजूदगी और दलदली इलाका इसे काफी चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। ऐसे में चॉकलेट मेढक की खोज एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
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