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Moon: चांद से मिट्टी लेकर आया था अमेरिका, धरती पर कंटेनर खुलते ही उड़े वैज्ञानिकों के होश, जानिए ऐसा क्या हुआ

Wed, 20 Sep 2023 04:00 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Science News - फोटो : NASA
Moon: अमेरिका ने 16 जुलाई 1969 को चांद पर मिशन भेजा था, जिसका नाम अपोलो 11 मिशन था। चांद की सतह पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग चांद की सतह पर पहुंचने वाले पहले इंसान बने। आर्मस्ट्रांग और उनके साथ गए बज एल्ड्रिन चांद पर आठ दिन तक रहे थे। इसके बाद वह 24 जुलाई 1969 को जब धरती पर लौटकर आए थे। वह चांद से एक चीज लेकर आए थे, जो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य की तरह थी। 

चांद से वैज्ञानिक मून डस्ट (Moon Dust) यानी चंद्रमा की मिट्टी को लेकर आए थे। वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी वाले कार्गो को खोला, तो वो हैरान हो गए। बताया जाता है कि अमेरिका के अपोलो 11 मिशन पर करीब दो लाख अरब करोड़ रुपये खर्च हुए थे। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का 29 जुलाई 1958 को गठन हुआ था। इसके 11 साल बाद ही नासा ने चांद पर इंसानों को उतारकर इतिहास रच दिया। 

 
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Science News - फोटो : iStock
क्यों हैरत में पड़ गए वैज्ञानिक

नासा के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और  बज एल्ड्रिन को चांद की सतह से मिट्टी लाने के लिए खास कंटेनर दिए गए थे। यह कंटेनर एल्युमिनियम के थे और पूरी तरह सील थे। चांद के लो प्रेशर को ध्यान में रखकर इसको डिजाइन किया था। दोनों अंतरिक्ष यात्री इस कंटेनर में करीब 50 पाउंड (करीबन 22.5 किलो) चांद की मिट्टी लेकर धरती पर आने के लिए रवाना हुए थे। 
 
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Science News - फोटो : Twitter@SPACEdotcom
धरती पर आने के बाद जब कंटेनर को खोला गया, तो वैज्ञानिकों के होश उड़ गए। जिस कंटेनर में मून डस्ट यानी चांद की मिट्टी को लाया गया था, वह पूरी तरह तहस-नहस हो चुका था। विशेष डिजाइन के बाद भी कंटेनर मून डस्ट को नहीं झेल पाया। सवाल था कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
 

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Science News - फोटो : NASA
खतरनाक है चांद की मिट्टी? 

वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी पर शोध किया, जिसके बाद वह हैरान हो गए। चांद की मिट्टी पृथ्वी की मिट्टी की तरह नहीं थी। एक तरह से यह सीसे के पाउडर की तरह था। नासा के मंगल मिशन में शामिल रही अंतरिक्ष यात्री केट ग्रीन ने अपने एक आर्टिकल में लिखकर बताया कि चांद की सतह पर लाखों उल्का पिंड की टक्कर हुई थी जिसके बाद मून डस्ट का निर्माण हुआ। उन्होंने बताया कि इसमें सिलिका और आयरन की तरह मेटल मिलते हैं। चांद की सतह पर न पानी है और न हवा। इस स्थिति में मून डस्ट बेहद शार्प होता है। 

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Science News - फोटो : iStock
खतरे में पड़ गई थी अंतरिक्ष यात्रियों की जान

चांद की मिट्टी की कितनी खतरनाक है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 1972 में नासा के अंतरिक्ष यात्री हैरिसन स्मित की जान इसके कारण खतरे में पड़ गई थी। जब वह चांद पर घूमने के बाद अपने अंतरिक्ष यान में वापस आए, तो उनके स्पेस शूट में मून डस्ट चिपककर अंदर आ गई। गलती से सांस के साथ वह उनके अंदर चली गई। इसके कुछ क्षण बाद स्मित की आंखें लाल हो गईं और उनकी नाक से पानी गिरने लगा। वह बीमार पड़ गए और किसी तरह उनकी जान बची।

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Science News - फोटो : iStock
स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के मुताबिक, चांद की मिट्टी इतनी खतरनाक होती है कि अगर यह इंसान के शरीर में एक चम्मच चला जाए तो 90 फीसदी फेफड़ों को कुछ मिनट के अंदर खराब कर सकता है। 
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