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Aditya L1: हैलो ऑर्बिट में स्थापित हुआ इसरो का आदित्य एल-1, जानिए क्या करेगा काम और क्यों जरूरी है यह मिशन

Sat, 06 Jan 2024 05:27 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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aditya l1 mission - फोटो : Isro
Aditya L1: मंगलयान और चंद्रयान की सफलता के बाद इसरो ने नया रच दिया इतिहास है। भारत का आदित्य एल-1 प्वाइंट (Aditya L1) हैलो ऑर्बिट यानी आखिरी कक्षा में स्थापित हो गया है। यह मिशन 400 करोड़ रुपए का है, जो भारत समेत पूरी दुनिया के सैटेलाइट्स को सौर तूफानों से बचाने का काम करेगा। आदित्य-एल1 की यात्रा की शुरुआत 2 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी, जो पांच महीने बाद 6 जनवरी 2024 की शाम सैटेलाइट L1 प्वाइंट पर पहुंच गया। इस प्वाइंट के चारों तरफ मौजूद सोलर हैलो ऑर्बिट में स्थापित हो गया है।

हैलो ऑर्बिट में डालने के लिए आदित्य एल-1 सैटेलाइट के थ्रस्टर्स को थोड़ी देर के लिए ऑन किया गया। आदित्य एल-1 सूरज की स्टडी कर रहे नासा के चार अन्य सैटेलाइट्स में शामिल हो गया है। आदित्य एल1 ने 37 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरा करने के बाद हैलो ऑर्बिट में पहुंचा। इसके बाद अब भारत की पहली सोलर ऑब्जरवेटरी धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थापित हो गई है। 
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aditya l1 mission - फोटो : Isro
क्या होता है हेलो ऑर्बिट 

एल-1 प्वाइंट के आसपास के इलाके को हेलो ऑर्बिट कहा जाता है। यह क्षेत्र सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के बीच मौजूद पांच स्थानों में से एक है। इस स्थान पर धरती और सूरज के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के बीच साम्यता है। दरअसल, यह स्थान दोनों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को एक दूसरे के प्रति संतुलन बनाता है। धरती और सूर्य के बीच इन पांच स्थानों पर स्थिरता मिलती है। इसकी वजह से यहां पर मौजूद वस्तु सूर्य या पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में नहीं फंसती है। 

 
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aditya l1 mission - फोटो : Istock
क्या करेगा आदित्य-L1? 

आदित्य एल-1 सौर तूफानों के आने की वजह का पता लगाएगा। इसके साथ ही सौर लहरों और उनका धरती के वायुमंडल पर क्या असर होता है, इस रहस्य से भी पर्दा उठाएगा। आदित्य एल-1 सूरज के कोरोना से निकलने वाली गर्मी और गर्म हवाओं का अध्ययन भी करेगा। सौर हवाओं के विभाजन और तापमान का अध्ययन करेगा और सौर वायुमंडल को समझने की कोशिश करेगा।
 

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aditya l1 mission - फोटो : iStock
मिशन की क्यों है जरूरत? 

सूरज हमारा एक तारा है, जिससे हमारे सौर मंडल को ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि इसकी उम्र 450 करोड़ साल है। सबसे खास बात यह है कि सौर ऊजा के बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है। सूरज की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण इस सौर मंडल में सभी ग्रह टिके हैं। सूरज के कोर यानी केंद्र में न्यूक्लियर फ्यूजन होता है, जिसकी वजह से सूरज चारों तरफ आग उगलता नजर आता है। 

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aditya l1 mission - फोटो : iStock
सूरज की स्टडी से सौर मंडल के दूसरे ग्रहों के बारे में समझ बढ़ेगी। सूरज के कारण धरती पर लगातार रेडिएशन, गर्मी, मैग्नेटिक फील्ड और चार्ज्ड पार्टिकल्स का बहाव आता है, जिसे सौर हवा या सोलर विंड कहा जाता है। इनका निर्माण उच्च ऊर्जा वाली प्रोटोन्स से होता है। सोलर मैग्नेटिक फील्ड के बारे में जानकारी मिलती है, जो कि बेहद विस्फोटक होता है।

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aditya l1 mission - फोटो : iStock
कोरोनल मास इजेक्शन के कारण आने वाला सौर तूफान से पृथ्नी को कई तरह के नुकसान की आशंका होती है। इसकी वजह से अंतरिक्ष के मौसम को जानना जरूरी है।  सूरज की वजह से यह मौसम बनता और बिगड़ता है। 
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