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9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला: अमेरिकी इतिहास का वो काला दिन, तबाही का मंजर देख आज भी दहल जाता है लोगों का दिल

Sat, 12 Sep 2020 09:45 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2001 में 11 सितंबर को अमेरिका में हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। इस हमले में अमेरिका का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। अमेरिका में हुए इन हमलों के लिए अल कायदा के 19 आतंकियों ने चार विमान हाइजैक किए थे। दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टॉवर्स में टकरा दिया, जबकि तीसरे विमान से पेंटागन पर हमला किया गया। एक विमान पेंसिलवेनिया में क्रैश हो गया था। इस हमले को 9/11 हमले के नाम से भी जाना जाता है।
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9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला - फोटो : सोशल मीडिया
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टावर को ध्वस्त होते ही लोगों की चीख पुकार मच गई और उठते धूल के गुबार को पूरी दुनिया ने अपने टीवी सेट पर देखा था। अमेरिका में हुए इन हमलों में 2,996 लोगों की मौत हो गई थी और 6,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उस समय जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के राष्ट्रपति थे।
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9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला - फोटो : सोशल मीडिया
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की इमारतों के गिरने के वजह से लाखों टन मलबा जमा हो गया था, जिसे बाद में दुनिया के कई देशों में भेजा गया। इतिहास के इस सबसे बड़े आतंकी हमले को अलकायदा के आतंकियों ने अंजाम दिया था।

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9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला - फोटो : सोशल मीडिया
हमले के पीछे था लादेन का हाथ
बुश ने तत्कालीन उप राष्ट्रपति डिक चेनी से कहा था, ‘हम युद्ध के मैदान में हैं।’ उन्होंने अपने सहयोगियों से आगे कहा, ‘जब हम गुनहगारों को पकड़ेंगे तो वे मुझे पसंद नहीं आएंगे। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।’ दिल दहला देने वाले इस हमले के पीछे अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का हाथ था।
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9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला - फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, अमेरिका ने इस हमले का बदला लिया और पाक के एबटाबाद में 2 मई 2011 को अमेरिकी कमांडो ने एक ऑपरेशन में अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले के बाद अमेरिका ने सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव किए पर आज भी अमेरिका पर आतंकी खतरा कम नहीं हुआ है।
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